बारां|ग्राम हनुवतखेड़ा में चल रही भागवत कथा के पांचवें दिन 56 भोग की झांकी सजाई। श्री गोवर्धन भगवान का प्रसंग बड़े रोचक ढंग से सुनाया। श्रद्धालुओं ने बढ़ चढ़कर श्री गोवर्धन भगवान का पूजन किया। रविवार को कथावाचक पंडित मुकुट बिहारी शास्त्री ने कहा कि इंद्र को अपनी शक्ति सत्ता पर घमंड हो गया था। इसलिए उस घमंड को दूर करने के लिए श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठ अंगुली पर उठाकर बृजवासियों की रक्षा की। इंद्र का अभिमान दूर किया। अभिमान ही मनुष्य का परम शत्रु है। जीवन में कभी अभिमानी मत बनो। कब समय का चक्र बदल जाए कोई भरोसा नहीं। इसलिए हमेशा मानव से मानव को प्रेम करना चाहिए। उन्होंने कहा है कि जीवन में जो भी होता है सभी स्वर की कृपा से ही होता है। हमारे नित्य कर्म के साथ धर्म से जुड़कर रहोगे तो हमारा धन परिवार सुरक्षित रहेगा। आधुनिक समय में स्वार्थ लालच के कारण परिवार टूटते जा रहे हैं, जबकि हमें हमेशा मिलकर रहना चाहिए। सास-बहू, देवरानी-जेठानी, भाई और बहन यह एक पवित्र रिश्ते हैं। इन्हें हमेशा पवित्रता बनाए रखो। हमारा जीवन अच्छा गुजरेगा। कथा के दौरान माखन लीला, महारास लीला, गोवर्धन लीला, कंस वध की कथा सुनाई गई। गिर्राज धरण में तो तेरी शरण भजन सुनाए। भागवत कथा का समापन 7 जनवरी को हवन प्रसाद के साथ होगा। सोनू मेहता, गजेंद्र मेहता, उदेश मेहता, लक्ष्मी नारायण मेहता ने भागवत कथा की आरती उतारी। कथावाचक व्यास पीठ पर विराजमान शास्त्री का शॉल ओढ़ाकर माल्यार्पण किया।


