भागवत बोले- संघ कहे तो पद छोड़ दूंगा:कोई भी हिंदू सरसंघचालक बन सकता हैं; सावरकर को भारत रत्न देने से पुरस्कार की गरिमा बढ़ेगी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि वीर सावरकर को भारत रत्न दिया गया तो इससे पुरस्कार की गरिमा और बढ़ेगी। मोहन भागवत ने संगठन में पद छोड़ने को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्हों कहा कि यदि संघ उनसे पद छोड़ने को कहेगा, तो वे तुरंत ऐसा करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आमतौर पर 75 वर्ष की उम्र के बाद किसी पद पर नहीं रहने की परंपरा की बात कही जाती है। भागवत ने मुंबई में RSS के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम के दौरान ये बातें कहीं। उन्होंने कि सरसंघचालक बनने के लिए क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र या ब्राह्मण होना कोई योग्यता नहीं है। जो हिंदू संगठन के लिए काम करता है। वही सरसंघचालक बनता है। भागवत की स्पीच की 8 बड़ी बातें मोहन भागवत के पिछले 2 बड़े बयान… 7 फरवरी: भागवत बोले- भारत में रहने वाले सभी हिंदू, संघ किसी के खिलाफ नहीं संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत में हिंदू ही है और कोई है ही नहीं। किसी खास रस्म या प्रार्थना से जुड़े धर्म को नहीं दिखाता है, न ही यह किसी खास समुदाय का नाम है। RSS किसी के खिलाफ नहीं है और न ही उसे सत्ता या पावर की इच्छा है। संघ राजनीति में सीधे तौर पर शामिल नहीं है, हालांकि संघ के कुछ लोग राजनीति में सक्रिय हैं। भागवत ने कहा कि बहुत से लोग कहते हैं कि नरेंद्र भाई आरएसएस के प्रधानमंत्री है। उनकी पॉलिटिकल पार्टी बीजेपी अलग है। उसमें बहुत स्वयंसेवक है, लेकिन संघ की नहीं। संघ के स्वयंसेवक उसमें हैं। पूरी खबर पढ़ें… 2 फरवरी: भागवत बोले- अवैध बांग्लादेशी-रोहिंग्या की पहचान करना सरकार की जिम्मेदारी RSS प्रमुख मोहन भागवत ने हैदराबाद में कहा कि अवैध रूप से भारत में घुसने वाले बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों की पहचान करना और उन्हें देश से बाहर भेजना सरकार की जिम्मेदारी है। नागरिक इस तरह के मामलों की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दे सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें… ————– ये खबर भी पढ़ें… भागवत बोले- भाजपा को RSS कंट्रोल नहीं करता, संघ को पार्टी के नजरिए से देखना गलत RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि भाजपा या विश्व हिंदू परिषद के नजरिए से आरएसएस को समझना गलत है। सभी स्वतंत्र रूप से काम करते हैं और संघ किसी (भाजपा) को कंट्रोल नहीं करता। संघ का उद्देश्य सत्ता, टिकट या चुनाव नहीं, बल्कि समाज की गुणवत्ता और चरित्र निर्माण है। पूरी खबर पढ़ें…

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