भागवत हमें जीवन जीने की सच्ची कला सिखाती है

संबलपुर/तेंदूआ| ग्राम तेंदुआ में श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान सप्ताह का आयोजन किया जा रहा। इस धार्मिक कार्यक्रम के कथावाचक पंडित आकाश उपाध्याय (मुंगेली वाले) है। उन्होंने श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि विदर्भ नरेश राजा भीष्मक के घर रुक्मिणी का जन्म हुआ। बाल्यकाल से ही वह भगवान श्रीकृष्ण को अपने हृदय से पति रूप में स्वीकार कर चुकी थीं, लेकिन भाई उनका विवाह शिशुपाल से करना चाहते थे। यह जानकर रुक्मिणी अत्यंत व्यथित हो उठीं। इसके आगे पंडित आकाश उपाध्याय ने पूरी कथा सुनाई। वहीं,उन्होंने कथा के दौरान कहा कि श्रीमद् भागवत कथा का मूल उद्देश्य परमात्मा परमेश्वर का संचार है,फलागम नहीं। बल्कि संसार में रहते हुए भगवान से जुड़ने की प्रेरणा देती है। भागवत श्रवण से मन निर्मल होता है। विवेक जागृत होता है व हृदय में भक्ति का उदय होता है। श्रीमद् भागवत हमें जीवन जीने की सच्ची कला सिखाती है। इस मौके पर मुख्य यजमान पालन सिंह वर्मा, तोरण बाई वर्मा, ग्राम प्रधान चंद्रशेखर राजपूत आदि मौजूद थे।

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