भाजपा की राह मुश्किल:2 सीटों के लिए मई में हो सकता है राज्यसभा चुनाव, इंडिया गठबंधन को मिल सकती है दोनों सीटें

झारखंड में राज्यसभा के लिए मई में दो सीटों पर चुनाव होने की संभावना है। इनमें एक सीट शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई है। वहीं भाजपा के दीपक प्रकाश का कार्यकाल 21 जून को पूरा हो रहा है। इसके बाद यह सीट खाली हुई है। इस चुनाव को लेकर पार्टियों ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है। वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद विधायकों की संख्या बल का समीकरण पूरी तरह से बदल गया है। नया समीकरण साफ इशारा कर रहा है कि इंडिया गठबंधन दोनों सीटें आसानी से निकाल सकता है। लेकिन एनडीए के लिए एक सीट निकालने की राह भी कठिन है। क्योंकि एनडीए के पास इतना संख्या बल नहीं है कि वे एक सीट जीत सके। उधर, झामुमो की दोनों सीटों पर नजर है। लेकिन घटक दल कांग्रेस दोनों सीटों के लिए उसे समर्थन देगी, यह भी इतना आसान नहीं है। इस चुनाव में इंडिया गठबंधन की गांठ कितना मजबूत रहेगी, इस पर भविष्य की राजनीति भी टिकी होगी। ये चार विकल्प हो सकते हैं 1. एकजुट रहे तो दोनों सीटें इंडिया को मिलेंगी अगर एकजुट रहे तो संख्या बल के आधार पर इंडिया गठबंधन दोनों सीटें आसानी से निकाल सकता है। क्योंकि एक प्रत्याशी की जीत के लिए 27 वोट चाहिए और इंडिया गठबंधन के पास 56 वोट है। लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव में सीट नहीं मिलने से झामुमो कांग्रेस से नाराज है। वह राज्यसभा चुनाव में इसका बदला लेने के मूड में है। इसलिए दोनों सीटों पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है। 2. कांग्रेस दोनों सीटों पर समर्थन दे, संभव नहीं पिछली बार दो सीटों पर चुनाव में एनडीए और इंडिया गठबंधन को एक-एक सीट मिली थी। चूंकि गांडेय विधायक डॉ. सरफराज अहमद ने कल्पना सोरेन के लिए अपनी विधानसभा सीट छोड़ दी थी। तब सीएम हेमंत सोरेन ने वादा किया था कि सरफराज को राज्यसभा भेजेंगे। ऐसा हुआ भी। मगर इस बार कांग्रेस दोनों सीटों पर समर्थन देने के मूड में कम ही दिख रही है। ऐसे में महागठबंधन में दरार पड़ सकती है। 3. भाजपा निर्दलीय को दे सकती है समर्थन भाजपा और एनडीए संख्या बल के आधार पर अकेले एक सीट निकालने की स्थिति में नहीं दिख रही है। क्योंकि इसके पास सिर्फ 24 वोट है। इसलिए भाजपा वेट एंड वॉच की स्थिति में है। लेकिन यह भी तय है कि भाजपा इतनी आसानी से दोनों सीटें इंडिया गठबंधन के लिए नहीं छोड़ने वाली। वह इंडिया गठबंधन का खेल बिगाड़ने के लिए निर्दलीय प्रत्याशी को बैकडोर से समर्थन दे सकती है। 4. जेएलकेएम के विधायक पर भी नजर जेएलकेएम के इकलौते विधायक जयराम महतो पर भी सभी की नजर रहेगी। विशेषकर एनडीए खेमे की। पहली बार जयराम महतो राज्यसभा चुनाव में अपना वोट करेंगे। जयराम महतो की रणनीति पर सभी की निगाहें रहेगी। वह किसी भी गठबंधन में शामिल नहीं है, स्वतंत्र विधायक हैं। अगर कोई थैलीशाह चुनाव मैदान में उतर गया तो राज्यसभा चुनाव बहुत दिलचस्प मोड़ ले सकता है। झामुमो में दावेदारों की लिस्ट लंबीअंजली सोरेन : हेमंत सोरेन की बड़ी बहन अंजली सोरेन सबसे प्रबल दावेदार के रूप में सामने आ रही हैं। वे ओडिशा में पार्टी संगठन को मजबूत करने में जुटी हैं। वे पिछले लोकसभा चुनाव में मयूरभंज और विधानसभा चुनाव में सरकसना सीट से चुनाव लड़ चुकी हैं। -शेष पेज 11 पर

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