बड़वानी जिले में किसानों को केला, पपीता और टिशु कल्चर के पौधों के लिए परेशान होना पड़ रहा है। 5-6 महीने पहले बुकिंग कराने के बाद भी किसानों को अब तक ये पौधे उपलब्ध नहीं हो सके हैं। इस समस्या को लेकर भारतीय किसान संघ ने रविवार शाम 5 बजे उद्यानिकी विभाग के आरएचयू आचाले को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि जिले में केला, पपीता और टिशु कल्चर पौधों की कंपनियों के अधिकृत डीलर और भारतीय किसान संघ की एक सामूहिक बैठक उद्यानिकी अधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित की जाए। भाकिसं के जिलाध्यक्ष भगवान पटेल ने बताया कि जिस तरह कंपनियां किसानों के साथ छलावा कर रही है, उससे किसान परेशान हैं। 5 से 6 महीने पहले बुकिंग देने के बाद भी किसानों को समय पर पौधे उपलब्ध नहीं करवाए जा रहे हैं। जिले में किसानों को बेवकूफ बनाया जा रहा है। किसानों को सीधा एक फसल का नुकसान हो रहा है। भारतीय किसान संघ ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि किसानों को गुमराह करने वाली कंपनियों एवं डीलरों पर अंकुश लगाया जाए। खुद को ठगा महसूस कर रहे किसान जिलाध्यक्ष भगवान पटेल ने बताया कि कंपनियां किसानों से बुकिंग करने के बाद कभी 10 तो कभी 15 दिन का समय देकर दो से तीन महीने का समय निकाल देती है, जिससे किसान अपने आप में ठगा महसूस कर रहा है। किसानों की इस समस्या को लेकर भारतीय किसान संघ ने मांग की है कि सभी डीलर ऑनलाइन बुकिंग करें। जिसकी एक प्रति किसान के पास रहे और कंपनी साल के अंदर जितने पौधे तैयार करती हैं, उतनी ही बुकिंग करें। कंपनी और डीलरों की बाढ़ आ चुकी है। किसानों का करोड़ों रुपया बुकिंग के नाम पर लेकर डीलर उपयोग कर रहे हैं। इस ओर उद्यानिकी विभाग ध्यान दे और जितने भी डीलर हैं, वे कंपनी से अधिकृत हो और उद्यानिकी विभाग को इसकी जानकारी दी जाए। पौधों के इंतजार में खाली पड़े किसानों के खेत किसान विजय पटेल रसवा ने बताया कि केले के पौधों के इंतजार में आज भी उनका खेत खाली पड़ा है। वहीं किसान मोहित मालवीय दवाना ने बताया कि काफी लंबे इंतजार के बाद उन्हें पौधे प्राप्त हुए। जिले के कई किसानों की यही स्थिति है। उन्होंने कहा कि कुछ किसान कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी में भी है। दवाना के हरिशंकर कुमावत ने बताया कि उन्होंने जैन कंपनी कैले बुक करे थे। तय तारीख से 40 दिन बाद उन्हें पैसे वापस कर दिए गए, जिसके बाद उन्होंने माल्ट बॉयो के पौधे बुक करे, उनके पौधे भी आज तक उन्हें प्राप्त नहीं हुए, जिससे उन्होंने इंतजार करने के बाद मजबूर होकर तरबूज खेत में लगाए हैं। दवाना के ही किसान प्रवीण धनगर ने बताया कि जैन कंपनी के पौधे डेड़ महीने लेट हो गए। इंतजार करते-करते वे थक चुके हैं।


