बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के एक युवा छात्र राजादित्य ने कैंसर पर ऐसी अनोखी रिसर्च की है, जो अब भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला रही है। इस किशोर ने लो-इंटेंसिटी पल्स्ड अल्ट्रासाउंड (LIPUS) तकनीक का इस्तेमाल कर कैंसर कोशिकाओं को चुनिंदा तरीके से नष्ट करने की संभावनाओं का अध्ययन किया, बिना स्वस्थ कोशिकाओं को कोई नुकसान पहुंचाए। इस शानदार उपलब्धि के चलते राजादित्य का चयन जुलाई 2026 में अमेरिका में आयोजित होने वाले जीनियस ओलंपियाड के लिए टीम इंडिया में हुआ है। यह रिसर्च सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन एजुकेशन द्वारा चलाए जा रहे RSI-इंडिया कार्यक्रम के तहत की गई, जो मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के प्रसिद्ध रिसर्च मॉडल पर आधारित है। IISc में प्रोफेसर अजय तिजोरे और शोधकर्ता अल्का कुमारी के मार्गदर्शन में राजादित्य ने PDMS ऑर्गन-ऑन-चिप प्लेटफॉर्म पर प्रयोग किए। शोध में पाया गया कि 50 किलोपास्कल अल्ट्रासाउंड दबाव पर लगभग 55% कैंसर कोशिकाएं पूरी तरह नष्ट हो गईं, जबकि स्वस्थ कोशिकाओं पर इसका असर न के बराबर रहा। इतना ही नहीं, उपचार के बाद कैंसर कोशिकाओं की फैलने की क्षमता भी काफी कम हो गई। विशेषज्ञ इसे भविष्य की कैंसर थेरेपी में एक बड़ा कदम मान रहे हैं, जहां दुष्प्रभाव कम होंगे और इलाज ज्यादा प्रभावी। इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा सम्मान मिला है। IRIS नेशनल फेयर और इंडियन नेशनल साइंस एंड इंजीनियरिंग फेयर (INSEF) में इसे गोल्ड मेडल से नवाजा गया। अब राजादित्य न्यूयॉर्क की सेंट जॉन फिशर यूनिवर्सिटी में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे, जहां वे अपनी रिसर्च को वैश्विक मंच पर पेश करेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपलब्धि न केवल भारतीय युवा वैज्ञानिक प्रतिभा का उदाहरण है, बल्कि भविष्य में कैंसर के सुरक्षित और प्रभावी इलाज की दिशा में नई उम्मीद भी जगाती है।


