सिरोही में पीएम श्री राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाया गया। इस अवसर पर बालिकाओं ने अपने गुरुजनों का पूजन किया।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता गोपाल सिंह राव ने भारतीय सनातन संस्कृति और पाश्चात्य संस्कृति के बीच अंतर स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि दोनों संस्कृतियों के मूल्यों में मूलभूत भिन्नता है। ‘संबंधों की पवित्रता को जन्मों के बंधन से जोड़ा जाता है’
राव ने बताया कि भारतीय सनातन संस्कृति आत्मसंयम और मर्यादा पर आधारित है। इसमें प्रेम का अर्थ कर्तव्य, समर्पण, त्याग और दीर्घकालिक उत्तरदायित्व है। नारी को माता, बहन, पुत्री और अर्धांगिनी के रूप में सम्मान देने की परंपरा है, और संबंधों की पवित्रता को विवाह जैसे जन्मों के बंधन से जोड़ा जाता है। उन्होंने आगे कहा कि सनातन संस्कृति में परिवार और समाज के दायरे में जीवन का लक्ष्य धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का संतुलन प्राप्त करना है। यह आत्मा को केंद्र में रखती है। ‘प्रेम एक दिन का उत्सव नहीं’
इसके विपरीत, पाश्चात्य संस्कृति व्यक्तिगत स्वतंत्रता और भोगवाद को अधिक महत्व देती है। इसमें प्रेम को अक्सर क्षणिक आकर्षण और शारीरिक इच्छाओं तक सीमित देखा जाता है। यह व्यक्ति-केंद्रित सोच, मनोरंजन और उपभोग प्रधान जीवन शैली को बढ़ावा देती है, तथा शरीर और इच्छाओं को प्राथमिकता देती है। राव ने वेलेंटाइन डे जैसे आयोजनों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वेलेंटाइन डे के नाम पर बनाए जाने वाले संबंध सनातन संस्कृति में स्वीकार्य नहीं हैं। प्रेम एक दिन का उत्सव नहीं, कोई गुप्त समझौता नहीं, और न ही किसी के शरीर को पाने का माध्यम है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वासना और प्रेम में बहुत बड़ा अंतर है। मर्यादा तोड़ना, जिम्मेदारी से भागना, या भविष्य को दांव पर लगाना प्रेम नहीं हो सकता। जो प्रेम माता-पिता से छिपाना सिखाए, संस्कारों से दूर करे, और आत्मसम्मान गिरवी रखवाए, वह प्रेम नहीं बल्कि भ्रम है। संस्कृति की रक्षा करने की अपील
सनातन संस्कृति सिखाती है कि प्रेम वही है जो विवाह तक जाए, सम्मान वही है जो आजीवन निभे और संबंध वही है जिसमें आत्मा सुरक्षित रहे। क्षणिक सुख जीवन भर का दुःख बन सकता है, जबकि संयमित प्रेम जीवन भर का सम्मान बनता है। उन्होंने लोगों से अपने संस्कारों पर गर्व करने, संस्कृति की रक्षा करने और प्रेम को पवित्र बनाने का आग्रह किया। प्रधानाचार्य हीरा खत्री के अनुसार कार्यक्रम में बालिकाओं ने गुरूजनों का पूजन मातृ—पितृ पूजन दिवस के रूप में किया। कार्यक्रम में उप प्रधानाचार्य देवी लाल, भगवत सिंह देवड़ा, पारस राजपुरोहित, श्रद्धा सिंदल, कुसुम परमार, दिनेश कुमार सुथार, रमेश कुमार मेघवाल, भारती सुथार, शिवानी राठौड़, कीर्ति सोलंकी व बालिकाएं उपस्थित रही।


