भारतीय सेना के लिए अब ऊंचे पहाड़ों और दुर्गम इलाकों में भारी भरकम हथियार पहुंचाना आसान हो गया है। महाजन फायरिंग रेंज में 20 टन तक भारी आर्मर्ड वाहनों को एयर ड्रॉप करने का सफल परीक्षण पिछले दिनों किया गया है। महाजन फायरिंग रेंज में इन दिनों सेना की पश्चिम कमान की स्ट्राइक कोर सहित कई यूनिट्स युद्धाभ्यास कर रही हैं। सैन्य सूत्रों ने बताया कि इसी दौरान सैन्य एयरबोर्न ट्रेनिंग स्कूल ने स्वदेशी 28-फीट हैवी ड्रॉप एडवांस सिस्टम 20टी (टाइप-वी) का परीक्षण किया। इस दौरान एक बख्तरबंद वाहन को ग्लोबमास्टर मालवाहक विमान से रेंज में सुरक्षित एयर ड्रॉप किया गया। यह सिस्टम एयरबोर्निक्स डिफेंस एंड स्पेस ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की इकाई एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट के साथ मिलकर तैयार किया है। यह परियोजना “मेक इन इंडिया” के तहत देश में रक्षा उपकरणों को स्वदेशी रूप से बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। भारतीय सेना की ताकत बढ़ी स्वदेशी 28-फीट हैवी ड्रॉप एडवांस सिस्टम 20टी (टाइप-वी) के सफल परीक्षण से भारतीय सेना की ताकत बढ़ गई है। खासकर दुश्मन को उसी के एरिया में घुसकर मात देने वाली पश्चिमी कमान की खड़गा कोर को इससे और मजबूती मिली है। इस परीक्षण के बाद काउंटर यूएएस ग्रिड से सीमाएं और सुरक्षित होंगी। महाजन में युद्धाभ्यास का हिस्सा बना परीक्षण स्वदेशी 28-फीट हैवी ड्रॉप एडवांस सिस्टम का परीक्षण महाजन फायरिंग रेंज में चल रहे युद्धाभ्यास का हिस्सा बना। जानकारी के अनुसार पहले करीब 15 टन वजनी बख्तरबंद वाहन को हवा से गिराकर परीक्षण किया गया। इसके लिए बीएमपी (बख्तरबंद कार्मिक वाहन) का इस्तेमाल किया गया। यह टेस्ट लगभग असली सैन्य हालात जैसे माहौल में किया गया। ट्विन एक्स-ट्रैक्टर सिस्टम की मदद से भारी वाहन को संतुलित और सुरक्षित तरीके से जमीन पर उतारा गया। क्या है हैवी ड्रॉप सिस्टम की खूबी कैसे काम करता है सिस्टम हैवी ड्रॉप सिस्टम बड़े ट्रांसपोर्ट विमानों से भारी सैन्य वाहन और उपकरणों को सुरक्षित तरीके से जमीन पर उतारने के लिए बनाया गया है। यह एक बार में 20 टन तक का वजन संभाल सकता है। यह लॉकहीड मार्टिन सी-130जे सुपर हरक्यूलिस और बोइंग सी-17 ग्लोबमास्टर-III जैसे बड़े मालवाहक विमानों के साथ काम कर सकता है। इसमें 28 फुट का खास प्लेटफॉर्म और पैराशूट सिस्टम लगाया गया है। दो बड़े एक्स-ट्रैक्टर पैराशूट और चार-पॉइंट लिंक सिस्टम की मदद से भारी सामान को पहले विमान से बाहर निकाला जाता है। इसके बाद धीरे-धीरे और संतुलित तरीके से जमीन पर उतारा जाता है। यह तकनीक भारी सैन्य उपकरणों को सुरक्षित और नियंत्रित तरीके से हवा से जमीन तक पहुंचाने में मदद करती है।


