भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर ड्रोन ने उड़ाए बंकर:मिट्टी में दबी माइंस को ढूंढ निकाला; 50 किलो तक के हथियार-बम साथ ले जा सकता है

भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर चल रहे युद्धाभ्यास में ऐसे ड्रोन का इस्तेमाल किया गया, जो आसमान से ही दुश्मनों के ठिकाने उड़ा देता है। अंबाला स्थित इस खड़गा कॉर्प्स के इंजीनियरों (खड़गा सैपर्स) ने स्पेशल ‘आर्म्ड ड्रोन’ (सशस्त्र ड्रोन) तैयार किया है। भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर युद्धाभ्यास में इसका ट्रायल किया गया। इस ट्रायल के तहत इस खास सैनिक ड्रोन ने मिट्टी में दबी माइंस और बंकरों को कुछ सेकेंड में ही ढूंढ निकाला और उन्हें गोला-बारूद से उड़ा दिया। इसकी खासियत है कि ये 50 किलो तक के हथियार और बम अपने साथ ले जा सकता है। फोटो में देखिए इस ड्रोन का सफल परीक्षण…
ड्रोन में लगे है मोर्टार शेल
जानकारी के अनुसार इन ड्रोन में मोर्टार शेल ड्रॉप सिस्टम (MSDS) लगे हुए हैं। जो इस तरह से काम करते हैं- यह सिस्टम मुख्य रूप से एक मैकेनिकल रिलीज मैकेनिज्म है, जिसे ड्रोन के नीचे फिट किया जाता है। सर्वो मोटर (Servo Motor): यह एक रिमोट-कंट्रोल्ड मोटर है, जो शेल को पकड़े हुए कुंडी (latch) को खोलती है। होल्डिंग ब्रैकेट: इसे इस तरह डिजाइन किया जाता है कि उड़ान के दौरान विस्फोटक सुरक्षित रहे और गिरने के समय सीधे नीचे की ओर जाए। कैमरा फीड: ऑपरेटर ड्रोन के नीचे लगे कैमरे की मदद से टारगेट को ‘लॉक’ करता है और सही ऊंचाई और हवा की गति का अंदाजा लगाकर बम गिराता है। क्यों खास है यह तकनीक?
युद्ध के दौरान दुश्मन सेना अक्सर अपनी सुरक्षा के लिए रास्ते में बारूदी सुरंगें, कंटीले तारों के जाल और कंक्रीट की मजबूत दीवारें खड़ी कर देती है। इन्हें सैन्य भाषा में ‘बाधाएं’ कहा जाता है। पुराना तरीका: पहले इन बाधाओं को हटाने के लिए ‘कॉम्बैट इंजीनियर्स’ को दुश्मन की सीधी गोलीबारी के बीच रेंगते हुए आगे बढ़ना पड़ता था। इसके बाद मैन्युअल तरीके से विस्फोटक लगाकर रास्ता साफ करना होता था। इसमें जान का जोखिम सबसे अधिक रहता था। नया ड्रोन युग: अब ‘खड़गा सैपर्स’ ने इसे बदलकर रख दिया है। अब मीलों दूर बैठकर ही कमांड सेंटर से इस ‘अदृश्य तीसरी आंख’ कहे जाने वाले ड्रोन को नियंत्रित किया जाता है। ये ड्रोन हवा से ही सटीक निशाना लगाकर दुश्मन के बंकरों और रुकावटों को मलबे में तब्दील कर देता है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार इसके तीन बड़े फायदे हैं: जीरो कैजुअल्टी: खतरनाक ऑपरेशन्स में सैनिकों को सीधे खतरे में पड़ने की जरूरत नहीं होगी। सटीकता और रफ्तार: ड्रोन तकनीक इतनी तेज है कि दुश्मन को संभलने या जवाबी कार्रवाई करने का मौका ही नहीं मिलता। मल्टी-टास्किंग: ये ड्रोन न केवल हमला कर सकते हैं, बल्कि रीयल-टाइम निगरानी भी करते हैं, जिससे सेना को दुश्मन की हर हरकत का पता रहता है। ये खबर भी पढ़ें। राजस्थान के रेगिस्तान में दुश्मन के विमान-ड्रोन पलभर में राख:स्ट्रेला-10 डिफेंस सिस्टम से भारतीय सेना ने उड़ाए; कोणार्क कॉर्प्स का युद्धाभ्यास राजस्थान के रेतीले धोरों में भारतीय सेना ने दुश्मन के विमानों को चुन-चुनकर मार गिराया। भारतीय सेना के स्ट्रेला-10 (Strela-10M) एयर डिफेंस सिस्टम ने दुश्मन के विमान और ड्रोन के इंजन से निकलने वाली गर्मी को टारगेट किया। फिर उसका तब तक पीछा किया, जब तक उसे हवा में ही राख नहीं कर दिया। (पढ़ें पूरी खबर)

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