भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट (तोपखाना) के गौरवशाली इतिहास और बलिदान को नमन करने के लिए निकली ‘भारत रणभूमि दर्शन’ वाहन रैली 11 फरवरी को स्वर्ण नगरी जैसलमेर की दहलीज पर दस्तक देगी। भारतीय सेना के मेजर लेरिन मैथ्यू ने इस अभियान के विवरण साझा करते हुए बताया कि यह रैली किस तरह सीमाओं पर तैनात प्रहरियों और आम नागरिकों के बीच देशभक्ति का संचार कर रही है। जैसलमेर में 5 दिनों का पड़ाव मेजर लेरिन मैथ्यू के अनुसार, 3 फरवरी को गुजरात के द्वारका से शुरू हुई यह यात्रा 11 फरवरी को जैसलमेर पहुंचेगी। यहाँ सेना और बीएसएफ के साथ मिलकर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। जैसलमेर में प्रवास के बाद यह कारवां 16 फरवरी को आगे बढ़ेगा। जैसलमेर से रवाना होकर यह दल बीकानेर और श्रीगंगानगर के सीमावर्ती इलाकों से होते हुए देश की राजधानी नई दिल्ली पहुंचेगी। 3,400 किमी का सफर, तीनों सेनाओं का समन्वय यह रैली केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि एक ‘ज्वाइंट ऑपेरशन’ की तरह है, जिसमें भारतीय नौसेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) भी कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। इस रैली में 15 गाड़ियां और 50 लोग सफर कर रहे हैं। 3,400 किलोमीटर लंबे इस रूट को विशेष रूप से उन रणभूमियों से जोड़ा गया है जहाँ आर्टिलरी ने दुश्मनों के दांत खट्टे किए थे। मुख्य उद्देश्य: युवाओं को प्रेरित करना सेना के मेजर लेरिन मैथ्यू ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य आर्टिलरी रेजिमेंट के ऐतिहासिक साहस को श्रद्धांजलि देना है। साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों के युवाओं को भारतीय सेना में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित भी करना है। और राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (दिल्ली) पर शहीदों को सम्मान अर्पित करना है। उन्होंने बताया- यह रैली हमारी समृद्ध सैन्य विरासत और आधुनिक आर्टिलरी की शक्ति का प्रतिबिंब है। जैसलमेर जैसे ऐतिहासिक और सामरिक स्थल पर इसका स्वागत सेना के मनोबल को और बढ़ाएगा।” 6 दिन करेगी सीमावर्ती क्षेत्रों का भ्रमण भारतीय सेना द्वारा देश की सैन्य विरासत, शौर्य और बलिदान से आम नागरिकों को जोड़ने के उद्देश्य से निकाली जा रही ‘भारत रणभूमि दर्शन’ रैली 11 फरवरी को मुनाबाव बॉर्डर से जैसलमेर पहुंचेगी। यह रैली जैसलमेर में 5 दिन तक ठहराव के दौरान सीमावर्ती क्षेत्रों, स्कूलों, वॉर म्यूजियम और अन्य प्रमुख स्थानों पर जाकर लोगों में देशभक्ति की भावना जागृत करेगी। अभियान का उद्देश्य देश के नागरिकों, विशेषकर युवाओं को भारत के ऐतिहासिक रणक्षेत्रों, सीमावर्ती इलाकों और सैनिकों के शौर्य गाथाओं से रूबरू कराना है।


