रणथंभौर टाइगर रिजर्व में टाइगर मुख्य आकर्षण का केंद्र है। यहां अक्सर टाइगर साइटिंग शानदार होती है, लेकिन रणथम्भौर में टाइगर से ज्यादा भालू की संख्या है। यहां अक्सर भालुओं की अच्छी साइटिंग भी होती है। रणथम्भौर के जोन एक से दस में भालू बहुतायत में दिखाई देते हैं। ऐसा ही नजारा गुरुवार सुबह की पारी में देखने को मिला। यहां पर दो भालुओं की शानदार फाइट देखने को मिली। जिसे देखकर पर्यटक रोमांचित होते उठे। दरअसल रणथम्भौर के जोन नंबर दो में गुरुवार सुबह की पारी में पर्यटक टाइगर सफारी के लिए गए थे। सफारी के दौरान पर्यटकों को यहां भालुओं के ग्रुप के दीदार हुए थे। इसी दौरान पर्यटकों ने यहां पर दो भालू की जबरदस्त फाइट देखी। यहां करीब 5 मिनट तक भालू एक दूसरे पर हमला करते रहे। जिसके बाद एक भालू के सरेंडर करने पर यह फाइट खत्म हुई। करीब पांच में एक भालू के सरेंडर कर दिया और वह भाग खड़ा हुआ। इस पूरे वाकया को यहां मौजूद पर्यटकों ने अपने कमरे में कैद कर लिया। जिसे बाद में पर्यटकों ने दैनिक भास्कर के साथ भी साझा किया है। रणथम्भौर में भालुओं की संख्या 100 से ज्यादा वन्यजीव विशेषज्ञों की मानें तो भालुओं की औसत उम्र करीब 12 वर्ष होती है। भालुओं के नाखून नुकीले होने के कारण बाघ भी भालुओं पर हमला करने से डरते हैं। रणथंभौर के सीसीएफ टीकम चंद वर्मा के अनुसार रणथंभौर में पिछले कुछ सालों में ग्रास लैंड काफी विकसित हुआ है। ग्रास लेंड विकसित होने से भालुओं की संख्या में भी वृद्धि हुई है, जो वन एवं वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से रणथम्भौर के लिए सुखद खबर है। रणथम्भौर में जहां साल 2014-15 में भालुओं की संख्या महज 60 से 70 थी, वहीं अब भालुओं की संख्या 100 के करीब पहुंच गई है। वहीं बाघ, बाघिन और शावकों की संख्या 75 के करीब है।


