भिंड के गोरमी में आयोजित नेत्र शिविर में नया खुलासा…:6 नहीं, 9 बुजुर्गों की रोशनी गई, आंख में फैला संक्रमण, अब शायद ही देख सकें

गोरमी के कृपे का पुरा में आयोजित शिविर में 6 नहीं, बल्कि 9 बुजुर्गों की आंखों की रोशनी जाने का मामला सामने आया है। सीएमएचओ डॉ. सचिन श्रीवास्तव के निर्देश पर 6 मरीजों को जेएएच के नेत्र रोग विभाग में जबकि 3 मरीजों को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जिन बुजुर्गों का ऑपरेशन हुआ है उनकी आंख में मवाद पड़ने की बात डॉक्टर कह रहे हैं। शुक्रवार दोपहर 12 बजे के करीब जेएएच में भर्ती हुुए मरीजों की आंख में दवा डाली गई। डॉक्टर का कहना है कि ऑपरेशन होने के 10 दिन बीतने के बाद ऑपरेशन वाली आंख में रोशनी लौटना मुश्किल है। यदि ऑपरेशन के दो से तीन दिन बाद मरीज आ जाते ताे इलाज से रोशनी वापस लाई जा सकती थी। इन बुजुर्गों की आंख का ऑपरेशन गोविंदपुरी स्थित कालरा हॉस्पिटल के डॉ. रोहित कालरा ने किया था। इस मामले में डॉ. कालरा के स्तर पर ऑपरेशन करने में लापरवाही हुई है या नहीं, इसका खुलासा जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। डॉक्टर बोला- आंख खराब हो गई, मैं जिम्मेदार नहीं हूं- जेएएच के भर्ती मरीज भूरी बाई के बेटे जितेंद्र लोधी ने बताया कि वह चपरा गांव का निवासी है। उसकी मां व बुआ की दोनों का आंख का ऑपरेशन कालरा अस्पताल में 9 दिसंबर को किया गया था। जबकि 10 दिसंबर को सुबह उनके आंखों की पट्‌टी खोलकर छुट्‌टी कर दी गई थी। पट्‌टी खोलने के बाद बुजुर्गों ने शिकायत की थी कि उन्हें दिखाई नहीं दे रहा। इस पर डॉक्टर ने कहा था कि दवा डालें। इससे दो तीन दिन में दिखने लगेगा। आंखों में जब रोशनी नहीं लौटी तो 14 दिसंबर को फिर कालरा अस्पताल पहुंचे। डॉक्टर ने 9 मरीजों की जांच की। इसके बाद एक दवा लिखी जिसकी कीमत तीन हजार रुपए थी और कहा कि इसे डालें, हो सकता है रोशनी लौट आए। डॉक्टर से जब कहा कि ऑपरेशन ताे आपने किया था। फिर ऐसा क्या हुआ जिससे आंख की रोशनी चली गई। इस पर डॉक्टर ने कहा कि आंख खराब हो गई है। इसके लिए मैं जिम्मेदार नहीं हूं। बेटा बोला- मेरे माता-पिता की आंखाें की रोशनी चली गई, वृद्धा अवस्था में अब कौन करेगा सेवा। चपरा निवासी केदार सिंह ने बताया उसकी मां चुन्नीबाई व पिता भागीरथ की आंखों की रोशनी ऑपरेशन के बाद चली गई है। अब उनकी सेवा कौन करेगा। जांच रिपोर्ट के बाद ही रोशनी जाने के कारणों का पता चलेगा तीन मरीज जिनके आंखों के पर्दे में दिक्कत बताई जा रही है, उन्हें निजी अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया है। जबकि 6 मरीजों को जेएएच के नेत्र रोग विभाग में भर्ती कराया गया है। जीआरएमसी की लैब से कल्चर रिपोर्ट की जांच आने के बाद ही पता चलेगा कि आखिर मरीजों की आंखों में इंफेक्शन कैसे पहुंचा।’ -डॉ. सचिन श्रीवास्तव, सीएमएचओ

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