भिंड नगर पालिका परिषद की बैठक में हंगामा:विधायक-अध्यक्ष के कथित प्रतिनिधि के बीच हुई बहस, माइक खींचने पर बाहर निकाला

भिंड नगर पालिका परिषद में सोमवार दोपहर आयोजित सामान्य सभा की बैठक उस समय हंगामे में बदल गई, जब विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह और नगर पालिका अध्यक्ष वर्षा बाल्मीकि के चचेरे ससुर सुनील बाल्मीकि (कथित अध्यक्ष प्रतिनिधि) के बीच तीखी बहस हो गई। बैठक में शहर के विकास कार्यों को लेकर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान विधायक ने अध्यक्ष के वार्ड में विकास कार्य रुके होने का मुद्दा उठाया। इस पर कथित अध्यक्ष प्रतिनिधि सुनील बाल्मीकि खड़े हो गए और माइक खींचते हुए अपना पक्ष रखने का प्रयास किया। इस पर विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह ने कड़ा ऐतराज जताया और कहा कि उन्हें परिषद की बैठक में बोलने का कोई अधिकार नहीं है। विधायक ने स्पष्ट किया कि बैठक का संचालन केवल अध्यक्ष या उपाध्यक्ष ही कर सकते हैं, किसी भी प्रकार के प्रतिनिधि की कोई वैधानिक भूमिका नहीं होती। विवाद बढ़ने पर विधायक नाराज हो गए और तत्काल सुनील बाल्मीकि को बैठक से बाहर करवा दिया। इस दौरान कुछ देर के लिए बैठक में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सुनील बाल्मीकि बोले: पूरे शहर में विकास कार्य ठप दैनिक भास्कर से बातचीत में सुनील बाल्मीकि ने अपनी पीड़ा जाहिर की। उन्होंने कहा कि पूरे भिंड शहर में विकास कार्य रुके पड़े हैं। पार्षद लगातार नाराज हैं और कई बार इस्तीफा देने की तैयारी तक कर चुके हैं। ऐसी स्थिति में नगर पालिका का संचालन ठीक से नहीं हो पा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें धमकियां दी गई हैं और समय आने पर वह उचित मंच पर शिकायत दर्ज कराएंगे।
विधायक का पक्ष: प्रतिनिधि की कोई हैसियत नहीं इस पूरे मामले पर विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि नगर पालिका अध्यक्ष का कोई प्रतिनिधि नहीं होता। उनके अनुसार, सुनील बाल्मीकि जबरन बैठक की दिशा मोड़ने का प्रयास कर रहे थे। पार्षदों के विरोध के बाद उन्हें बैठक से बाहर किया गया। विधायक ने हंगामे की बात से इनकार करते हुए कहा कि बैठक पूरी तरह शांतिपूर्ण रही। उन्होंने यह भी बताया कि बैठक में सर्वसम्मति से करीब 50 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को मंजूरी दी गई है, जिनका असर जल्द ही धरातल पर दिखाई देगा।

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