भिंड जिले के कोंहार गांव में शुक्रवार सुबह सर्व समाज की बैठक में जाटव समाज के खिलाफ सामाजिक बहिष्कार का निर्णय लिया गया। गांव के हनुमान मंदिर पर जुटे ब्राह्मण-क्षत्रिय समाज सहित अन्य वर्गों के लोगों ने शपथ लेकर सामाजिक संबंध समाप्त करने की घोषणा की। ग्रामीणों ने इसे हाल ही में दर्ज हुई एससी-एसटी एक्ट की एफआईआर और कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के विरोध में उठाया गया कदम बताया। जानकारी के अनुसार शुक्रवार सुबह करीब 10:30 बजे से 11:00 बजे के बीच कोंहार गांव स्थित हनुमान मंदिर परिसर में बैठक बुलाई गई। बैठक में ब्राह्मण, क्षत्रिय सहित अन्य समाजों के ग्रामीण बड़ी संख्या में मौजूद रहे। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि जाटव समाज के कुछ लोगों द्वारा हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं तथा ब्राह्मण-क्षत्रिय समाज और मनुवाद को लेकर विरोध जताया गया। जाटव समाज का बहिष्कार करने की शपथ ली
बैठक के दौरान ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से शपथ ली कि वे जाटव समाज के लोगों के साथ सामाजिक मेलजोल नहीं रखेंगे। इसमें उनके घर आना-जाना बंद करना, सभी संबंध समाप्त करना तथा खेतों में कामकाज से जुड़े संपर्क भी खत्म करने जैसे निर्णय लिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि 17 फरवरी को दर्ज हुई एससी-एसटी एक्ट की एफआईआर के विरोध में यह शपथ समारोह आयोजित किया गया। उनका आरोप है कि एफआईआर एकतरफा कार्रवाई है, जिससे गांव का सामाजिक माहौल प्रभावित हुआ है। झूठा केस बताकर निष्पक्ष जांच की मांग की
बैठक में मौजूद लोगों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई। ग्रामीणों का कहना था कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो आगे भी सामूहिक निर्णय लिए जा सकते हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले सुरपुरा क्षेत्र में कथित पेशाब कांड के बाद भी सर्व समाज द्वारा जाटव समाज के खिलाफ सामाजिक बहिष्कार का निर्णय लिया गया था। कोंहार गांव की यह घटना जिले में दूसरी बार है जब इस प्रकार का सार्वजनिक विरोध और शपथ कार्यक्रम सामने आया है। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। गांव में स्थिति सामान्य बताई जा रही है।


