भिनाय उपखंड के न्यायिक मामलों को ट्रांसफर करने का विरोध:वकीलों ने बिजयनगर भेजने के प्रस्ताव पर जताई नाराजगी, राजस्थान हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को सौंपा ज्ञापन

केकड़ी के भिनाय उपखंड के न्यायिक मामलों का क्षेत्राधिकार बिजयनगर ट्रांसफर करने के प्रस्ताव का विरोध शुरू हो गया है। जिला बार एसोसिएशन केकड़ी ने इस संबंध में राज्यपाल, मुख्यमंत्री और राजस्थान हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को उपखंड अधिकारी के माध्यम से एक ज्ञापन भेजा है। बार अध्यक्ष सीताराम कुमावत ने बताया- वर्तमान में केकड़ी में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के दो न्यायालय संचालित हैं। इन न्यायालयों के क्षेत्राधिकार में केकड़ी, सावर, सरवाड़ और भिनाय थाना एवं उपखंड क्षेत्र के सभी न्यायिक मामले शामिल हैं। उन्होंने जानकारी दी कि प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायालय की स्थापना वर्ष 1989-90 में कैंप के रूप में हुई थी, जिसे 1997 के आसपास स्थायी न्यायालय का दर्जा मिला। प्रकरणों की बढ़ती संख्या को देखते हुए वर्ष 2013-14 में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संख्या-2 की भी स्थापना की गई। तब से दोनों न्यायालयों में कार्य सुचारू रूप से चल रहा है। कुमावत के अनुसार, बिजयनगर में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय की स्थापना का प्रस्ताव राज्य सरकार और उच्च न्यायालय स्तर पर विचाराधीन है। इस दौरान बिजयनगर क्षेत्र के वकीलों भिनाय उपखंड का क्षेत्राधिकार बिजयनगर में ट्रांसफर करने की मांग कर रहे हैं। बार एसोसिएशन का मानना है कि यह भिनाय क्षेत्र के नागरिकों के लिए असुविधाजनक होगा। बार अध्यक्ष ने बताया- पिछले 50 वर्षों से भिनाय उपखंड का संपूर्ण न्यायिक क्षेत्राधिकार केकड़ी में ही रहा है। वर्तमान में भी सिविल और फौजदारी के कई प्रकरण केकड़ी न्यायालयों में विचाराधीन हैं। भिनाय क्षेत्र के वकील भी नियमित रूप से केकड़ी में ही वकालत करते हैं। भिनाय उपखंड क्षेत्र केकड़ी से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी से शुरू होकर अधिकतम 35-40 किलोमीटर तक फैला है। उन्होंने यह भी कहा कि भिनाय उपखंड वर्तमान में अजमेर जिले में आता है और पूर्व में केकड़ी जिले का हिस्सा रहा है, व एडीएम न्यायालय को भी भिनाय क्षेत्र के मामलों की सुनवाई का अधिकार रहा है। ऐसी स्थिति में भिनाय को बिजयनगर क्षेत्र से जोड़ना नागरिकों और वकीलों के लिए अनुचित होगा। ज्ञापन सौंपने के दौरान महासचिव समकित जैन, उपाध्यक्ष द्वारकाप्रसाद पंचैली, पुस्तकालय अध्यक्ष आदित्यभानसिंह, वित्त सचिव फरीद खान, सामाजिक कल्याण सचिव राजूलाल जाट सहित सैकड़ों अधिवक्ता उपस्थित थे।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *