राजस्थान के भिवाड़ी स्थित जिस अवैध पटाखा फैक्ट्री में 7 मजदूरों की जलकर मौत हुई है, उसके तार चीन से जुड़ रहे हैं। पड़ताल में सामने आया कि फैक्ट्री में कच्चा माल और बारूद चीन से आता था। बारूद के ढेर पर वहां काम करने वाले बिहार के मजदूरों का बीमा तक नहीं था। उन्हें 20 से 30 हजार रुपए का लालच देकर दिन-रात काम कराया जाता था। फैक्ट्री गेट पर हमेशा ताला लगा रहता था। फैक्ट्री में ही उनके खाने और सोने की व्यवस्था की गई थी, ताकि अवैध रूप से पटाखे बनने का मामला उजागर न हो जाए। भिवाड़ी के खुशखेड़ा रीको एरिया स्थित अवैध पटाखा फैक्ट्री में 16 फरवरी की सुबह करीब साढ़े नौ बजे धमाका हुआ था। उसमें 7 मजदूर जिंदा जल गए थे, जबकि 4 गंभीर रूप से झुलस गए थे। इन्हें एम्स दिल्ली रेफर किया गया था। उधर, दैनिक भास्कर की टीम ने फैक्ट्री के एक अवैध गोदाम का पता लगाया है। इसमें फैक्ट्री का कुछ कच्चा माल मिला है। फैक्ट्री मालिक ने इसे एक महीने पहले ही खाली किया था, लेकिन कुछ कच्चा माल वहीं रह गया था। जांच में यह भी पता चला है कि पटाखों का एक और गोदाम है। ये दोनों गोदाम फैक्ट्री इलाके के 500 मीटर के दायरे में हैं। सबसे पहले देखिए, हादसे का CCTV खुशखेड़ा में फैक्ट्री के गोदाम पहुंची भास्कर टीम दैनिक भास्कर की टीम खुशखेड़ा इलाके में हादसे वाली जगह से करीब 500 की दूरी पर स्थित एक गोदाम पर पहुंची। वहां एक महिला मिली। उसने अपना नाम संतोष बताया। उसने कहा कि यहां अब पटाखे नहीं हैं। काफी देर तक उसने गेट नहीं खोला, लेकिन बाद में समझाने पर उसने अंदर जाने दिया। अंदर एक बड़े हॉल में कुछ चीन में बने पटाखे बनाने का कच्चा माल कट्टों में भरा मिला। कट्टे के ऊपर चीन की कंपनी ‘अनहुई वानवेई ग्रुप’ (Anhui Wanwei Group) का नाम था। इसमें रासायनिक उत्पाद (बारूद) था। कुछ खाली रैपर का ढेर भी मिला था, जिनपर मेड इन चाइना लिखा था। फैक्ट्री वेयरहाउस से जुड़ी 3 PHOTOS… नाबालिग मजदूर का अवैध पटाखा फैक्ट्री में काम करने का खुलासा फैक्ट्री में काम करने वाले नाबालिग मजदूर ने अवैध पटाखा बनाने के तौर-तरीकों का खुलासा किया। नाबालिग ने बताया- यहां बजरी को सुखाया जाता है, जिसमें चांदी का घोल भी मिलाया जाता है। फिर उसे मशीन में डालकर पटाखे बनाकर पैक किया जाता है। नाबालिग मजदूर ने कहा- मुझे इस फैक्ट्री में काम करते हुए सात साल हो गए हैं। मैं आज काम पर नहीं गया। मैं खाटू श्यामजी गया था। उन्हें पैकेट के हिसाब से 100 रुपए मिलते हैं, जिससे वे महीने में लगभग 30 हजार रुपए कमा लेते हैं। उसने फैक्ट्री के मालिक को कभी नहीं देखा। 27 लोग फैक्ट्री में काम करते थे, बाकी कहां? नाबालिग ने बताया- फैक्ट्री में कुल 27 लोग काम करते थे। उनमें से चार लोग आग लगने के बाद किचन के कमरे से बाहर भागे हैं। बाकी दो-चार छुट्टी पर हो सकते हैं। आशंका है कि फैक्ट्री में काम करने वालों की संख्या इससे अधिक भी हो सकती है। अभी भी कई लापता, मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका नाबालिग ने बताया- अभी तक केवल 7 लोगों के शव मिले हैं, जबकि 4 लोग घायल हैं। इस तरह कुल 17 लोगों के अंदर होने की जानकारी है। हालांकि, यह संख्या कम या ज्यादा भी हो सकती है। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है। खैरतल-तिजारा केडीएसपी शिवराज सिंह ने बताया- अभी तक गोदाम के बारे में पूरी जानकारी नहीं मिल पाई है, लेकिन पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। ————– हादसे से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए…


