भीख मांगने, कबाड़ उठाने, दूसरों के घरों में हेल्पर व झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों की जिंदगी सुधारने के लिए शहर की संस्था ने मां शारदा विद्या पीठ स्कूल की नींव रखी थी। अब तक 5000 बच्चों की जिंदगी सुधार चुकी संस्था ने 2009 में पहले स्कूल की नींव पक्खोवाल रोड के भगत सिंह नगर में रखी थी। अब इन स्कूलों की संख्या 30 है। इन स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के चार्टर्ड अकाउंटेंट, फोटोग्राफर, बैंक में नौकरी व कई के कॉलेज जाने के सपने पूरे हुए हैं। इन स्कूल का खर्च 18 से 20 व्यापारी मिलकर उठाते हैं। ये संस्था नोबल फाउंडेशन है। छात्रों की प्रेरणादायक कहानियां एक स्टूडेंट ने फाउंडेशन के माध्यम से 12वीं तक पढ़ाई पूरी की और अब चार्टर्ड अकाउंटेंट के साथ कार्यरत हैं। वह पहले झुग्गी में रहता और कचरा उठाने का काम करता था। स्कूल के बाद भी उसने कॉलेज की पढ़ाई के लिए किसी शॉप में पार्ट-टाइम काम करते हुए कॉलेज पास किया। शिवम जो लुधियाना के हैबोवाल में रहते हैं, फाउंडेशन के स्कूल में दाखिला लिया और अब कॉलेज की तैयारी कर रहे हैं। दाना मंडी के पास की झुग्गियों में रहने वाले स्टूडेंट ने स्कूल में पढ़ाई-लिखाई में ज्यादा अच्छा नहीं पर आज वह एक फोटोग्राफर के रूप में काम कर रहा है और अपने परिवार का सारा खर्च उठा रहा है। आत्मनिर्भरता के साथ साफ- सफाई का भी ख्याल स्कूलों में बच्चों को कला, क्राफ्ट, डांस, रंगोली और डिबेट जैसी प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाता है। इन गतिविधियों से बच्चों में आत्मविश्वास और स्पीच कला में सुधार होता है। इसके अतिरिक्त, कई बच्चे स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ स्किल्स को सीख कर अपना बिजनेस भी शुरू कर चुके हैं। बच्चों को अपने घरों में स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित करने के लिए एक प्रतियोगिता आयोजित की जाती है।


