भीलवाड़ा जिले का जहाजपुर कस्बा अब से यज्ञपुर के नाम से जाना जाएगा। सीएम भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को बजट बहस के जवाब के दौरान विधानसभा में यह घोषणा की है। साथ ही भीलवाड़ा में अगले साल 20 टाउन प्लानिंग योजनाएं लाए जाने का ऐलान किया गया। जहाजपुर भीलवाड़ा का ऐतिहासिक क़स्बा है, जिसे अब यज्ञपुर (यज्ञ का स्थान) के नाम से भी जाना जाएगा। मान्यता है कि यहां महाभारत काल में राजा जनमेजय ने नागयज्ञ किया था। मौर्य सम्राट सम्प्रति की ओर से निर्मित यह दुर्ग मेवाड़ और हाड़ौती की सीमा का प्रहरी रहा है, जिसे राणा कुंभा ने पुननिर्मित करवाया था। जहाजपुर (यज्ञपुर) का इतिहास-प्रमुख तथ्य मान्यताओं के अनुसार- यहां जनमेजय ने यज्ञ किया था, इसलिए इस शहर का नाम यज्ञपुर था। यह भी माना जाता है कि जहाजपुर का किला मौर्य सम्राट अशोक के पोते सम्प्रति ने कराया था। वे जैन धर्म के अनुयायी थे। यह किला बूंदी और मेवाड़ की रक्षा के लिए एक मुख्य गिरिद्वार (पहाड़ी दर्रे) के रूप में काम करता था। राणा कुंभा से संबंध कहा जाता है कि राणा कुंभा ने जहाजपुर के किले को दोबारा बनवाया और मजबूत काम कराया। यहां स्वस्तिधाम में मुनि सुव्रतनाथ की चमत्कारी प्राकट्य प्रतिमा स्थित है। जहाजपुर के मुख्य दर्शनीय स्थल बड़ा देवरा (पुराने मंदिरों का समूह), ऐतिहासिक पुराना किला और गैबीपीर की मस्जिद है। इसके अलावा नागदी नदी और पास में ही स्थित घटारानी माताजी का स्थान है। ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए बदला नाम ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए, क्षेत्र के विधायक गोपीचंद मीणा ने विधानसभा में जहाजपुर का नाम बदलकर ‘यज्ञपुर’ करने की मांग की थी। यह क्षेत्र अपनी प्राचीन संस्कृति, खनिज संपदा और मेवाड़ी विरासत के लिए जाना जाता है।


