भीलवाड़ा में होलिका दहन के अवसर पर आस्था और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिला। पंचमुखी मोक्षधाम स्थित मसानियां भैरव नाथ मंदिर में श्रद्धालुओं ने चिता की भस्म से होली खेली। आधी रात श्मशान घाट से बाबा भैरव नाथ की शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच निकली सवारी के बाद श्रद्धालुओं ने चिता की राख को रंग-गुलाल की तरह उड़ाते हुए भस्म होली खेली। 16 वर्षों से निभाई जा रही परंपरा पंचमुखी मोक्षधाम में स्थित मसानियां भैरव नाथ मंदिर के पुजारी रवि कुमार ने बताया कि पिछले 16 वर्षों से यहां श्मशान होली का आयोजन किया जा रहा है। देश में चिता भस्म की होली मुख्य रूप से मणिकर्णिका घाट और काशी नगरी में प्रसिद्ध है। इसी परंपरा की तर्ज पर भीलवाड़ा में भी यह आयोजन होता है। सवा 11 बजे निकली पालकी, सवा 12 बजे पहुंची चिता स्थल होलिका दहन की रात सवा 11 बजे बाबा भैरव नाथ की पालकी निकाली गई, जो गाजे-बाजे के साथ सवा 12 बजे चिता स्थल पहुंची। वहां श्रद्धालुओं ने बाबा को चिता भस्म अर्पित की और एक-दूसरे को भस्म लगाकर होली खेली। डीजे की धुन पर भक्ति और उत्साह आधी रात के बाद तक श्मशान घाट में डीजे की धुन गूंजती रही। भक्तों ने धार्मिक गीतों पर जमकर नृत्य किया और बाबा के जयकारे लगाए। कई श्रद्धालु हाथों में तलवार और कटार लेकर पारंपरिक अंदाज में नृत्य करते नजर आए। इस आयोजन में भीलवाड़ा ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों से भी महिलाएं, बच्चे और युवा शामिल हुए। सालभर रहता है इंतजार श्रद्धालुओं का कहना है कि वे कई वर्षों से यहां चिता भस्म की होली खेलने आ रहे हैं। उनका विश्वास है कि बाबा भैरव नाथ उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। भक्तों के अनुसार इस अनूठी भस्म होली का उन्हें पूरे साल इंतजार रहता है। होली उत्सव के PHOTOS …


