भास्कर न्यूज | दाढ़ी दाढ़ी क्षेत्र से होकर बहने वाली सकरी नदी पिछले 15-16 वर्षों से ठंड के मौसम में ही सूख जाती है। फरवरी के अंत तक नदी पूरी तरह सूखकर खेल मैदान बन गई है। बरसात में यही नदी बाढ़ का रूप लेती है, जिससे किनारे बसे गांवों को भारी नुकसान होता है। जल संसाधन विभाग ने नदी में पानी रोकने और भूजल स्तर बढ़ाने के लिए कई जगह एनीकट बनाए हैं। कवर्धा जिले के केसली बिटकुली गांव से बेमेतरा जिले तक किसानों को सिंचाई सुविधा देने के लिए सकरी नहर बनाई गई है। इससे 50 हजार एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि की सिंचाई होती है। इससे किसान आर्थिक रूप से मजबूत हुए हैं। लेकिन गर्मी में यही नदी सूखकर मैदान बन जाती है। इससे नदी किनारे बसे गांवों के किसान चिंतित हैं। इस साल गर्मी में हालात और खराब हैं। सकरी नदी में पानी रहने से आसपास के गांवों में गर्मी में भी जल स्तर बना रहता था। हैंडपंप, पावर पंप, कुएं और तालाबों में मई-जून में भी पानी रहता था। अब हालात बदल गए हैं। पंडरिया क्षेत्र से गुजरने वाली फोक और हाफ नदी भी सूख चुकी हैं। इन नदियों के किनारे बसे बेमेतरा जिले के करीब सवा सौ गांवों में निस्तारी के लिए संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी के लिए लोग दूर-दूर भटक रहे हैं। नदी किनारे के पेड़ों की कटाई: दाढ़ी के 90 वर्षीय किसान दयाराम साहू ने बताया कि पहले गर्मी में भी नदी के हर घाट में कमर तक पानी रहता था। दोनों किनारों पर कदम के पेड़ थे। गांव वालों ने पेड़ों की कटाई कर दी। इससे जल स्तर घट गया। नदी को बचाने के लिए कोई सरकारी प्रयास नहीं हो रहा सकरी नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए अब तक कोई सरकारी प्रयास नहीं हुआ है। गिधवा गांव के मोहन चंद्राकर ने कहा कि सरकार को सकरी नदी के संरक्षण के लिए योजना बनानी चाहिए। इससे नवागढ़ विधानसभा क्षेत्र के सवा सौ गांवों को बारहमासी निस्तारी पानी मिल सकेगा। उन्होंने नदी किनारे पौधारोपण की मांग की है ताकि नदी को फिर से जीवित किया जा सके।


