भास्कर न्यूज| अलवर रमजान के दूसरे जुमा पर मस्जिदों में िवशेष नमाज अता की गई। मुख्य नमाज से पहले रोड नंबर दो स्थित जामा मस्जिद में तकरीर भी हुई। िजसमें इमाम मौलाना मोहम्मद अनस ने कहा कि रोजा केवल भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं है, बल्कि इंसान को हर तरह की बुराइयों से बचने की सीख देता है। उन्होंने कहा कि मुंह का रोजा बुरा नहीं बोलना, आंखों का रोजा बुरा नहीं देखना, कान का रोजा बुरा नहीं सुनना और हाथों का रोजा गलत काम से बचना है। रमजान इंसान को आत्मसंयम, सब्र और नेक रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। तकरीर के बाद खुतबा पढ़ा गया और फिर दो रकात की जुमा नमाज अता कराई गई। नमाज शुरू होने से पहले ही जामा मस्जिद खचाखच भर गई। बड़ी संख्या में लोगों ने पहली मंजिल पर बैठकर नमाज अता की। आखिर में अमन-चैन, खुशहाली, बीमारों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ और तरक्की के लिए खास दुआ मांगी गई। नमाज के बाद कई लोगों ने जरूरतमंदों को दान भी दिया। मस्जिद के बाहर लगी धर्म प्रचार की दुकानों पर टोपी, मुसल्ला, रूमाल, माला की खरीदारी भी हुई। ओवरब्रिज के पास मदरसे की मस्जिद में मौलाना मोहम्मद अमजद ने नमाज अता कराई। यहां छत पर नमाज पढ़ने वालों के लिए धूप से बचाव को टेंट की व्यवस्था की गई। ट्रांसपोर्ट नगर, नंगली मोहल्ला और प्रतापबंध स्थित मस्जिदों में भी विशेष नमाज अता की गई।


