छत्तीसगढ़ में हुए निकाय चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गड़बड़ी का आरोप लगाया है बघेल ने कहा कि नगरीय निकाय चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से हुए, लेकिन परिसीमन की गलतियों के कारण मतदाताओं को परेशानी उठानी पड़ी। कई लोगों के मतदान केंद्र बहुत दूर थे, जिससे वोट प्रतिशत में गिरावट आई। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में 90 से 100 जगहों पर ईवीएम खराब हुईं, जिससे मतदान प्रभावित हुआ। उन्होंने नगरीय निकाय चुनाव, धान खरीदी, महाकुंभ की अव्यवस्थाओं, कानून व्यवस्था, केंद्रीय बजट और अंतरराष्ट्रीय मामलों को लेकर कड़ी आलोचना की। धान खरीदी में किसानों को हुई दिक्कतें धान खरीदी पर उन्होंने कहा कि, सरकार ने 160 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा था, लेकिन केवल 145 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया। बघेल ने आरोप लगाया कि सरकार ने किसानों के धान खरीदने में अड़चन डाली, लेकिन कांग्रेस के दबाव के कारण सरकार को झुकना पड़ा। महाकुंभ में अव्यवस्था पर सरकार को घेरा महाकुंभ की व्यवस्थाओं को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार इसे अपनी राजनीति चमकाने के लिए इस्तेमाल कर रही है। श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण अव्यवस्था फैल गई। भगदड़ की घटनाओं पर सरकार चुप्पी साधे हुए है। राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर चिंता राजधानी रायपुर में चुनाव के दिन 60 लाख की डकैती पर बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कानून व्यवस्था चरमरा चुकी है। रोज हत्या, लूट और अपराध बढ़ते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि न्यायधानी में अवैध शराब से मौतें हो रही हैं, लेकिन सरकार इन्हें मछली खाने से हुई मौत बताकर मामले को छिपा रही है। केंद्रीय बजट को बताया निराशाजनक केंद्रीय बजट में छत्तीसगढ़ को मिलने वाला फायदा बताने केद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी रायपुर पहुंचे थे। जिसे लेकर उन्होंने कहा कि बजट में आम जनता के लिए कुछ भी नहीं है। मजदूरों की मजदूरी नहीं बढ़ाई गई, किसानों को एमएसपी नहीं मिला, और युवाओं के लिए रोजगार की कोई योजना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट सिर्फ उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाया गया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार की चुप्पी पर सवाल अमेरिका द्वारा 104 भारतीयों को बेड़ियों में डालकर वापस भेजने के मामले में बघेल ने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले भी भारतीयों को वापस भेजा गया था, लेकिन इस बार उन्हें अपराधियों की तरह हथकड़ियां पहनाई गईं, और सरकार चुप बैठी रही।


