भोजपुर में तीन दिवसीय महादेव महोत्सव का शुभारंभ:बुंदेली लोकगायन और लखबीर सिंह लक्खा के भजनों से शिवमय हुआ मंदिर परिसर

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर रायसेन जिले स्थित भोजपुर मंदिर परिसर में तीन दिवसीय “महादेव” भोजपुर महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन, रायसेन के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव का शुभारंभ रविवार शाम को हुआ। यह आयोजन श्रद्धा, संस्कृति और कला का अद्भुत संगम बनकर श्रद्धालुओं और कला-रसिकों को आकर्षित कर रहा है। भव्य शिवालय की विशालता के बीच गूंजते लोकगीत और भजनों से सजी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां वातावरण को दिव्य बना रही थीं। महोत्सव के पहले दिन की पहली प्रस्तुति बुंदेली लोकगायन की रही। बुन्देलखण्ड अंचल के लोकगीतों में यहां की संस्कृति का सौंदर्य और शिव के प्रति गहरी आस्था व विश्वास के सुर रचे-बसे हैं। स्वरों के शिव बारात का स्वरूत दिखाया
सागर के ऋषि विश्वकर्मा एवं उनके साथी कलाकारों ने अपने गीतों से ऐसा समां बांधा कि श्रोताओं के अंतर्मन तक शिवत्व की धारा प्रवाहित हो गई। उन्होंने “शिव शंकर जी बनके दुल्हा मोरी नगरिया आए जू” और “गौरा व्याहन भोला की बारात है चली” जैसे गीतों से शिव बारात का अलौकिक स्वरूप स्वरों के माध्यम से अभिव्यक्त किया। इसके बाद “हम जानत कछु नोने से हुए राजा हिमाचल के दामाद”, “दुल्हा बनके महादेव बाबा गांव में आ गए रे”, “गौरा सांची बताओ कैसे करवा लाए भोले बाबा से ब्याव” और “दुल्हा शिव शंकर की बारात आ गई” जैसे भजनों से महाशिवरात्रि पर पूरे वातावरण को शिवमय कर दिया। प्रस्तुति का समापन “गौरा तोरे जैसे सैया पूरे गांव भरे में नैया”, “भरदुपरे आ गओ री अरे जो बैरागिया” और “लुटिया में लाई भोला भंग” जैसे गीतों से हुआ। बधाई एवं बरेदी लोकनृत्य की भी प्रस्तुति
अगले क्रम में बुन्देलखण्ड के सुप्रसिद्ध बधाई एवं बरेदी लोकनृत्य की प्रस्तुति दी गई। श्री उमेश नामदेव एवं उनके साथी कलाकारों (सागर) द्वारा प्रस्तुत बधाई नृत्य, जो मांगलिक एवं शुभ अवसरों पर किया जाता है, ने शिवरात्रि के पावन अवसर पर मंच पर दिव्य आनंद बिखेर दिया। इसके बाद बरेदी लोकनृत्य में परम्परा, संस्कृति एवं जीवन का उल्लास देखने को मिला। अंतिम प्रस्तुति सुविख्यात भजन गायक श्री लखबीर सिंह लक्खा एवं साथी, मुम्बई की भक्ति गायन की रही। अपने चिर-परिचित और आस्था से ओतप्रोत अंदाज में श्री लक्खा ने एक से बढ़कर एक भजनों की ऐसी सुरधारा प्रवाहित की कि पूरा परिसर मानो शिवमय हो उठा। हर शब्द में श्रद्धा, हर आलाप में समर्पण और हर ताल में भक्ति का कंपन अनुभव किया गया। श्रोतागण भाव-विभोर होकर कभी ताली, तो कभी हर-हर महादेव के उद्घोष लगाते रहे। मंत्रमुग्ध कर देने वाली स्वर-लहरियों ने वातावरण को शिव-तत्व की दिव्य सुगंध से आलोकित कर दिया। उन्होंने प्रस्तुति की शुरुआत जय शंभू जय जय शंभू…. भजन के साथ की। इसके बाद उन्होंने अपने लोकप्रिय भजनों से श्रद्धालु श्रोताओं को भक्ति के रस से सराबोर कर दिया। देखिए तस्वीरें…

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