नेशनल ग्रीन ट्रूब्नल (NGT) ने मध्यप्रदेश और नगरीय निकायों को प्लास्टिक प्रदूषण और माइक्रोप्लास्टिक्स से निपटने के लिए सुझाव और निर्देश जारी किए हैं। भोपाल का उदाहरण देते हुए कहा कि भोपाल में 50 से अधिक अवैध प्लास्टिक रीसाइक्लिंग यूनिट हैं। इससे करीब 2 लाख लोगों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। एनजीटी की केंद्रीय क्षेत्र पीठ भोपाल के न्यायमूर्ति श्यौ कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने इस मामले में टिप्पणी की है। अधिकरण ने नोट किया कि भोपाल में 50 से अधिक अवैध प्लास्टिक रीसाइक्लिंग यूनिटें लगभग 2 लाख नागरिकों के लिए गंभीर जोखिम उत्पन्न कर रही हैं। इसलिए उपाय जरूरी है। एनजीटी ने ये निर्देश दिए ये अपशिष्ट प्रबंधन स्वास्थ्य और जोखिम का यह मूल्यांकन 27 मार्च को होगी सुनवाई
एनजीटी ने कहा है कि राज्य और जिला स्तर की समितियां प्लास्टिक कचरा और माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण की निगरानी करें। वहीं, चार सप्ताह के भीतर यानी, 27 मार्च तक पर्यावरण सचिव को कार्रवाई की रिपोर्ट जमा करें। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, क्षेत्रीय अधिकारी समेत भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा और उज्जैन नगर निगम इस मामले को गंभीरता से लें।


