कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना में बड़ी गड़बड़ी का बड़ा खुलासा हुआ है। प्रदेशभर के स्कूलों में 25,187 लघु निर्माण और मरम्मत कार्यों के लिए भूपेश सरकार ने अपने खत्म होते कार्यकाल के ठीक पहले एक झटके में 1807.68 करोड़ रुपए स्वीकृत कर दिए। मई-जून 2023-24 में हुए इन कामों के लिए कलेक्टरों से बजट निर्माण एजेंसी जिला स्तर पर ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस), आदिवासी विकास विभाग, पीडब्ल्यूडी और कुछ जगहों पर हाउसिंग बोर्ड को जारी हुआ। इंवेस्टिगेशन में खुलासा हुआ है कि ठेकेदारों ने स्कूलों की बाहरी दीवारों पर पेंट कर, चकाचक फोटो ऑनलाइन पोर्टल में अपलोड किए। अफसरों ने आंखें मूंदकर बिना थर्ड पार्टी वेरीफिकेशन के 1191.49 करोड़ रु. भुगतान कर दिए। उधर, इस योजना में गड़बड़ियों की शिकायतों के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 33 जिला कलेक्टरों को जांच का आदेश देते हुए कहा कि योजना में भारी अनियमितताएं हुई हैं, फंड का दुरुपयोग हुआ है। कलेक्टर जांच पूरी करें। इसके पहले भास्कर ने पैरेलल इंवेस्टिेगेशन किया। रिपोर्टर 5 जिलों के 40 स्कूलों में पहुंचा। स्कूलों में निर्माण अधूरे हैं। कक्ष निर्माण के लिए खोदे गए गड्ढे तक नहीं भरे हैं। खिड़की-दरवाजे नहीं लगाए। ब्लैक बोर्ड प्लास्टर, फ्लोरिंग, पुट्टी, पेंटिंग, टाइल्स लगाना और बिजली फिटिंग जैसे काम अधूरे हैं। करोड़ों खर्च के बाद भी छात्र-छात्राओं को बेहतर सुविधा नहीं मिल पाई हैं। उधर 24 फरवरी को पेश राज्य बजट में स्कूलों में लघु निर्माण-मरम्मत के लिए सिर्फ 46 करोड़ का प्रावधान किया गया। क्यों? जवाब है- पूर्व में स्कूल जतन योजना में हुई गड़बड़ियां। साय सरकार ने रोके 4773 काम, बचाए 616 करोड़
मुख्यमंत्री के साथ शिक्षा मंत्री का पद संभाल रहे विष्णुदेव साय को जब स्कूल जतन योजना में गड़बड़ी की शिकायतें मिली तो उन्होंने नए मरम्मत-निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी। 4,773 कार्य रोक दिए गए। इनके लिए 616 करोड़ रुपए का बजट था।
तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं- 5 जिलों के 40 स्कूलों की पड़ताल सहायक आयुक्त ने की ठेकेदारों के साथ सांठ-गांठ, निर्माण अधूरे; भुगतान 14.26 करोड़ का गरियाबंद जिले में निर्माण-मरम्मत कार्य के लिए 2 एजेंसी को जिम्मेदारी दी गई। आरईएस को 850 और आदिवासी विकास विभाग को 165 कार्य सौंपे गए। मैनपुर ब्लॉक रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) कार्यालय से 100 मी. की दूरी पर प्राइमरी स्कूल जयंती नगर में 16.60 लाख रु. में 2 कमरे बने लेकिन अंदर न प्लास्टर हुआ है और न ही फ्लोरिंग। सालभर से ये ऐसे ही पड़ा है। यह निर्माण आदिवासी विकास विभाग ने किया है। विभाग के बनाए 100 से अधिक स्कूलों आधे-अधूरे पड़े हैं। पड़ताल में खुलासा हुआ कि साल 2022-23 में अपर कलेक्टर नवीन भगत को सहायक आयुक्त आदिवासी विकास नियुक्ति किया गया। उन्होंने मैनुअल टेंडर जारी कर 3 ठेकेदारों के बीच 165 कार्यों को बांट दिया। 40 प्रतिशत काम हुआ, और भुगतान 70 प्रतिशत (करीब 14.26 करोड़ रु.) कर दिया गया। शिकायतों पर कलेक्टर ने जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर की अध्यक्षता में 3 सदस्यीय कमेटी गठित की। इस कमेटी की प्रारंभिक जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। सीईओ ने कहा- अभी कई और बिंदुओं पर जांच जारी है। उधर, दशपुर प्राइमरी स्कूल में आरईएस ने 2 कमरों में 5.21 लाख रु. में सिर्फ टाइल्स लगाई, पोताई तक नहीं की। आमामोरा में 8.68 लाख में स्लैब तोड़कर नया स्लैब बनाया। फ्लोरिंग की टाइल्स नहीं लगाई। ओढ़ में 8.60 लाख रु. में स्लैब तोड़कर नया स्लैब डाला। बिजली फिटिंग, चैनल गेट, दरवाजे और खिड़की नहीं बदले। टाइल्स नहीं लगाई।
इन सभी की थी सीधी जिम्मेदारी कलेक्टर
प्रशासकीय स्वीकृति जारी करने, निर्माण एजेंसी तय करने और समीक्षा का अधिकार था। आरईएस
पीडब्ल्यूडी, आदिवासी विकास विभाग व हाउसिंग बोर्ड। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई)
आरके त्रिपाठी, सहायक संचालक, भवन कक्ष को राज्य नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था, वे अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। वर्तमान नोडल अधिकारी एएन बंजारा कहते हैं- सभी चीजें विभाग स्तर से हो रही हैं। प्राचार्य की सुनिए
ठेकेदारों ने मई-जून की गर्मी की छुट्टी में मरम्मत कार्य किया। 15 जून को स्कूल खुले तो ठेकेदारों ने प्राचार्यों से पूर्णता प्रमाण-पत्र पर साइन करवा लिए। इसके आधार पर भुगतान हो गया। प्राचार्यों ने कहा- मरम्मत की कहां-क्या आवश्यकता है, किसी ने नहीं पूछा। ठेकेदार ने मर्जी से काम किया। कुछ ही स्कूलों में काम ठीक हुआ है।


