श्वानों की नसबंदी के बिल पास करने के सत्यापन के दौरान कई रोचक संवाद सामने आए हैं। सत्यापन के दौरान परिवादी ने कहा कि नसबंदी किए श्वानों की गिनती कर लो, ताकि बिल समय पर पास हो सके। इस पर चिकित्सकों ने कहा कि तुझे ईमानदारी से काम करने के लिए किसने कहा? पता नहीं कमीशन देना पड़ता है? पीड़ित ने मना किया तो तीन बार नोटिस भी दे दिए। इस बीच हेरिटेज एरिया का टेंडर ही दूसरी फर्म को दे दिया। बताया जा रहा है कि निगम ने जिस दूसरी फर्म को टेंडर दिया है, वो चिकित्सकों के अनुसार ही गिनती करवा रही है। एसीबी अब उसकी भी जांच करेगी। डीआईजी आनंद शर्मा ने बताया कि सत्यापन के बाद एएसपी भूपेन्द्र सिंह की आधा दर्जन टीमें सोमवार दोपहर एक बजे कार्रवाई के लिए रवाना हो गई। ऑपरेटर जितेन्द्र ने पहले दोपहर 2 बजे निगम ऑफिस बुलाया। बाद में सी-स्कीम के लिए बोल दिया। फिर दो घंटे इंतजार करवाकर 4 बजे रिश्वत लेने पहुंचा। ऐसे में जितेन्द्र को पकड़ने के दौरान दूसरी टीमों ने चिकित्सकों को भी पकड़ लिया। 2 से लेकर 15% तक कमीशन मामले में ठेकेदारों का कहना है कि बिल पास कराने के लिए कमीशन की पूरी शृंखला तय है। बाबू स्तर पर फाइल आगे बढ़ाने के बदले 2% लिया जाता है। इसके बाद फाइल डॉक्टर, उपायुक्त, एकाउंटेंट और अन्य अधिकारियों तक पहुंचती है, जहां 10% राशि बंट जाती है। पशु प्रबंधन शाखा में संविदा कर्मियों के माध्यम से और इंजीनियर शाखा में एक्सईएन व अधीक्षण अभियंता के जरिए राशि उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने का आरोप है। रिश्वत के रूप में स्पेन और थाईलैंड के टिकट भी मांगे नगर निगम के पशु चिकित्सकों ने पीड़ित के बिल पास करने की एवज में 15 लाख रुपए के साथ-साथ रिश्वत के रूप में स्पैन व थाईलैंड की यात्रा के टिकट भी मांगे थे। रिश्वतखोर अफसरों ने ये बात तब कही जब केन्द्र सरकार ने बजट में विदेश यात्रा पर कुछ टैक्स कम किया था। एसीबी अन्य अधिकारियों की भूमिका पर भी संदेह जता रही है। ACB का छापा पड़ते ही आयुक्त ग्रेटर निगम से हेरिटेज निगम चले गए जयपुर | लालकोठी स्थित नगर निगम ग्रेटर मुख्यालय में जैसे ही अधिकारियों को एसीबी की कार्रवाई की सूचना मिली, निगम आयुक्त डॉ. गौरव सैनी निकल गए। वे पिछले गेट से स्मार्ट सिटी कार्यालय पहुंचे और वहां एक घंटे रहे। इसके बाद पूर्व हेरिटेज निगम कार्यालय पहुंच गए। शाम 7:30 बजे तक वहां रहे और एसीबी कार्रवाई की जानकारी लेते रहे। डॉक्टरों को पकड़ने पीछे-पीछे घूम रही थी दो टीमें इससे पहले दोनों चिकित्सक अपने-अपने क्षेत्र में फिल्ड में घूम रहे थे। डॉ. योगेश शर्मा हवामहल के पास और डॉ. राकेश कलोरिया एयरपोर्ट के पास वाले एरिया में थे। एसीबी दोनों का लगातार पीछा कर रही थी। इधर, ऑपरेटर ने रिश्वत लेने में देरी कर दी। तब तक दोनों निगम ऑफिस पहुंच गए। एसीबी ने दोनों के घर व अन्य ठिकानों पर सर्च शुरू कर दिया है।


