भ्रष्टाचार की हद:स्कूल भवन में आई 3 करोड़ की लागत, 7 साल में ही हो गया जर्जर, 4 साल पहले मरम्मत में लगे 5 लाख रुपए

महाराजा बदन सिंह सीनियर सेकेंडरी स्कूल में समग्र शिक्षा अभियान के अधिकारियों और इंजीनियरों की निगरानी में करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया भवन महज सात साल में ही जर्जर हो गया है। हालत यह है कि छत का लैंटर टूटकर गिर रहा है, सरिए बाहर झांक रहे हैं और दीवारों में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं, जिससे यहां पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। स्कूल भवन का निर्माण कार्य वर्ष 2016 में शुरू हुआ था और 2018 में इसे स्कूल प्रशासन को हैंडओवर कर दिया गया। इसके बावजूद कुछ ही वर्षों में भवन की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। दो मंजिला इस इमारत में 18 कमरे बने हैं, जहां कक्षा 1 से 12वीं तक के करीब 400 छात्र रोजाना पढ़ाई करते हैं। अभिभावकों और शिक्षकों का कहना है कि बच्चे जिन कमरों में बैठते हैं, उनकी छत और दीवारें कभी भी गिर सकती हैं। लगातार गिरते प्लास्टर और झड़ते कंक्रीट के कारण हर दिन हादसे का डर बना रहता है। भवन निर्माण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार सामने दिख रहे हैं। देखने में पीलरों की चौड़ाई करीब 18 इंच लग रही है। जबकि मौके पर प्लास्तर हटाकर देखने पर केवल 10 इंच कंक्रीट डाली गई। शेष 8 इंच हिस्से में ईंट की चुनाई कर ऊपर से प्लास्टर कर दिया गया, ताकि बाहर से भवन मजबूत दिखाई दे सके। इस खुलासे ने निर्माण कार्य की निगरानी और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसीबी ने हाल ही में समसा के दो जेईएन को ठेकेदार से 23.40 रुपए लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। जिसमें एडीपीसी, लेखाधिकारी, कैशियर और एईएन तक कट जाने जाने की बात सामने आई थी। स्कूल प्रशासन के अनुसार एसीबी द्वारा ट्रैप जेईएन धीरेंद्र श्रीवास्तव की देखरेख में निर्माण कराया गया था। मरम्मत के लिए अब फिर से एक करोड़ रुपए हुए मंजूर स्कूल प्रशासन का दावा है कि भवन की जर्जर स्थिति को देखते वर्ष 2022 में इसकी मरम्मत कराई गई थी। प्रशासन के अनुसार, करीब 5 लाख रुपये की लागत से छत, दीवारों और अन्य हिस्सों की मरम्मत कराई गई थी, ताकि भवन को सुरक्षित बनाया जा सके। हालांकि, मरम्मत के बावजूद भवन की हालत में कोई ठोस सुधार नहीं दिख रहा है। कुछ ही समय में फिर से छत का लैंटर टूटने लगा और दीवारों में दरारें उभर आईं। स्कूल भवन की मरम्मत के लिए सरकार द्वारा करीब 1 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है प्रशासन का कहना है कि मरम्मत कार्य यदि समग्र शिक्षा अभियान के माध्यम से कराया गया, तो गुणवत्ता पर फिर से सवाल खड़े हो सकते हैं। इसलिए यह कार्य सीधे स्कूल प्रशासन की देखरेख में कराया जाना चाहिए। “समसा के तहत बना स्कूल भवन के लैंटर टूटकर गिरते है। दरारे आ चुकी है। इसमें रोजाना करीब 400 बच्चे और शिक्षक बैठते हैं, जिनकी सुरक्षा पर खतरा बना रहता है। इसकी जानकारी विभाग को दे दी गई है।” -सुदामा परासर, प्रिंसिपल, महाराजा बदन सिंह सी.सै. स्कूल सुरेंद्र खंडेलवाल, रिटायर्ड इंजीनियर ईंटों से बनाई बीम। आरसीसी भवन का सात साल में ही टूटना गंभीर तकनीकी गड़बड़ी और कमजोर निगरानी का संकेत है। सामान्यतः ऐसे भवन 40–50 साल तक सुरक्षित रहते हैं, लेकिन यहां घटिया सामग्री, गलत ग्रेड की कंक्रीट, कम सीमेंट और खराब रेत-गिट्टी के उपयोग, निम्न क्वालिटी की सरिए का उपयोग लैंटर का टूटने का कारण हो सकते हैं। समय से पहले शटरिंग हटाना और सही क्योरिंग न करना भी लैंटर गिरने का कारण हो सकता है। यह केवल ठेकेदार की नहीं, बल्कि देखरेख करने वाले इंजीनियरों और अधिकारियों की भी जिम्मेदारी है।

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