मंडी जिले के रिवालसर में आयोजित तीन दिवसीय राज्य स्तरीय छेशचू मेला इस बार राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है। बल्ह के विधायक इंद्र सिंह गांधी ने प्रेस वार्ता कर मेला आयोजन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मेले को राज्य स्तरीय पहचान मिलने का स्वागत किया, लेकिन जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा को अनुचित बताया। विधायक इंद्र सिंह गांधी ने कहा कि उन्हें मेले के लिए औपचारिक निमंत्रण नहीं दिया गया। उनके अनुसार, निमंत्रण पत्र उनके निवास स्थान पर बिना सूचना दिए छोड़ दिया गया, जिसे उन्होंने व्यवस्था में कमी करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह राज्य स्तरीय आयोजन था, तो क्षेत्र के विधायक को सम्मानपूर्वक आमंत्रित करना आयोजकों की जिम्मेदारी थी। उन्होंने इसे “व्यवस्था परिवर्तन” के दावों के विपरीत आचरण बताया। प्रशासन और मेला कमेटी के रवैये पर उठाए सवाल गांधी ने प्रशासन और मेला कमेटी के रवैये को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता के प्रतीक होते हैं, इसलिए इनमें सभी जनप्रतिनिधियों और समुदाय के लोगों की सहभागिता सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मेले की भव्यता बढ़ाने के लिए मंदिरों और मठों से सहयोग लिया गया, जो एक सकारात्मक पहल है। वैसाखी मेले को भी राज्य स्तरीय दर्जा देने की मांग विधायक गांधी ने सुझाव दिया कि जिस प्रकार छेशचू मेले को राज्य स्तरीय विस्तार दिया गया है, उसी प्रकार अप्रैल माह में आयोजित होने वाले वैसाखी मेले का दायरा भी बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैसाखी मेला भी क्षेत्र की आस्था और संस्कृति से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है, जिसे व्यापक पहचान और प्रशासनिक सहयोग मिलना चाहिए। भविष्य में प्रोटोकॉल और सम्मान का ध्यान रखने की उम्मीद गांधी ने उम्मीद जताई कि भविष्य में ऐसे आयोजनों में प्रोटोकॉल और जनप्रतिनिधियों के सम्मान का ध्यान रखा जाएगा। उनका कहना है कि इससे किसी प्रकार की असहज स्थिति उत्पन्न नहीं होगी और मेले की गरिमा बनी रहेगी।


