मंत्री बोले-जहां विरोध होगा वहां सरकार फिर से विचार करेगी:कन्हैयालाल बोले- जो मापदंड में नहीं थे उन जिलों को निरस्त किया; JJM में राजस्थान में काम नहीं हुआ

प्रदेश सरकार के जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी आज जोधपुर जिले में जल जीवन मिशन की बैठक लेने के लिए जोधपुर पहुंचे। इस दौरान नए जिलों को लेकर कहा कि जो जिले मापदंड में नहीं थे उन्हें हटाया गया। हमने 2011 की जनगणना के अनुसार मापदंड है उसके आधार पर जिलों को लेकर निर्णय किया गया। जिन जिलों में SDM के करने लायक काम भी नहीं है वहां जिला कलेक्टर कैसे काम कर पाएगा। इसलिए हमने बिना किसी भेदभाव के ऐसे जिले हटवाए। देश में औसत जिलों का एवरेज 20 लाख आबादी है। हम इसका 50 प्रतिशत कम कर सकते हैं। लेकिन तीन तीन लाख की आबादी पर जिले कैसे बना सकते हैं। इसलिए जितने भी जिले हटें हैं वो मापदंड पूरा नहीं कर रहे थे। आगे भी कोई भी जिले बने या इन जिलों को हटाने को लेकर कहीं पर भी विरोध होता है तो ऐसे गांव जो 10 लाख ली आबादी से जुड़ना चाहते हैं उन्हें लेकर विचार किया जा सकता है। राजस्थान में JJM का काम पूरा नहीं हुआ कन्हैयालाल चौधरी ने कहा कि जल जीवन मिशन को लेकर जो काम राजस्थान में मार्च 2024 तक पूरा होना था उसे हम समय पर पूरा नहीं कर पाए। पूरे भारत में सब जगह काम हो गया लेकिन राजस्थान में नहीं कर पाए। हमारे जितने भी पुराने ट्यूबवेल, बोरवेल, हैडपंप हैं उन्हें दुरुस्त करवाने का काम किया जा रहा है। पांच साल पुराने जो भी है हैडपंप हैं उनकी डिटेल मंगवाई जा रही है। कहीं पर पानी लीकेज हो रहा है, कई पर पानी की चोरियां की जा रही है। इन सभी पर मीटिंग में चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि जहां भी खुले बोरवेल है उससे भविष्य में हादसे नहीं हो इसको लेकर निर्देशित किया गया है। कई जगहों पर प्राइवेट काश्तकार भी ट्यूबवेल खुदवाता है। उसे भी चेक करवाया जाएगा कि उसमें परमिशन ली है या नहीं। पानी पहुंचाने का काम किया जा रहा चौधरी ने कहा कि हर घर कनेक्शन करने से पहले हमें सोर्स को ढूंढना था पानी उठाने के सिस्टम डेवलप करने थे, फिल्टर प्लांट बनाने चाहिए थे राइजिंग लाइन बनने के बाद हमें हर घर कनेक्शन देने चाहिए थे लेकिन समस्या यह हो गई की हर जगहों पर घर-घर कनेक्शन तो कर दिए गए लेकिन जहां से पानी उठाने की व्यवस्था करनी थी वह नहीं कर पाए। अब उन पर काम कर रहे हैं। उनके प्रोजेक्ट बना रहे हैं टेंडर निकाल रहे हैं इस पूरे काम में 2 से 3 साल लगेंगे। जब तक उपभोक्ता को पानी कैसे मिले इस पर काम किया जा रहा है।

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