मंदिर-मस्जिद समेत हाईवे पर बने 2216 अवैध निर्माण हटेंगे:हाईकोर्ट ने कहा- 2 महीने में एक्शन लें, दोबारा अतिक्रमण हुआ तो अफसर जिम्मेदार

राजस्थान हाईकोर्ट (जोधपुर) ने प्रदेश के नेशनल हाईवे से सभी अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने कहा- प्रदेश के नेशनल हाईवे पर ‘राइट ऑफ वे’ में आने वाले सभी 2216 अतिक्रमणों को दो महीने में हटाया या स्थानांतरित किया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सड़कों पर सुरक्षित आवाजाही संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत मौलिक अधिकार है। इसमें किसी भी प्रकार का अवरोध ‘संवैधानिक गलती’ है। प्रदेश में हाईवे पर 103 मंदिर, मस्जिद आदि धार्मिक संरचनाएं हैं। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने ‘हिम्मत सिंह गहलोत बनाम राजस्थान राज्य’ जनहित याचिका में यह रिपोर्टेबल जजमेंट दिया है। मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च को होगी। दुर्घटना ने खोला अवैध निर्माणों का काला चिट्ठा यह मामला जोधपुर के चौखा सुलिया बेरा निवासी हिम्मत सिंह गहलोत की ओर से दायर जनहित याचिका से शुरू हुआ। कोर्ट ने अपने आदेश में 22 जनवरी 2026 की एक दुखद घटना का जिक्र किया। इसमें एक धर्मकांटे (वेब्रिज) के पास अवैध कट और अतिक्रमण के कारण हुई दुर्घटना में चार लोगों की जान चली गई थी। कोर्ट ने माना कि यह हादसा केवल एक संयोग नहीं, बल्कि हाईवे सुरक्षा मानकों के खुले उल्लंघन का प्रत्यक्ष परिणाम था। हाईवे के भीतर क्या है ‘निषिद्ध क्षेत्र’? नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के वकील अंकुर माथुर ने कोर्ट को तकनीकी मानकों से अवगत कराया। इसके अनुसार हाईवे की केंद्र रेखा से दोनों ओर दूरियां इस प्रकार निर्धारित हैं- धार्मिक संरचनाओं पर कोर्ट का रुख अदालत ने कहा- ‘राइट ऑफ वे’ के भीतर आने वाले किसी भी स्ट्रक्चर को केवल इसलिए नहीं छोड़ा जा सकता कि वह धार्मिक है। सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2009 के एक आदेश का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा- सार्वजनिक सड़कों या फुटपाथों पर मंदिरों, मस्जिदों या गुरुद्वारों को बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती। प्रशासनिक तालमेल नहीं, विभागों को सख्त चेतावनी कोर्ट ने पाया कि माइनिंग, बिजली, जल और स्थानीय निकाय विभाग अक्सर NHAI की अनुमति के बिना ही लाइसेंस या कनेक्शन दे देते हैं। कोर्ट ने निर्देश दिए- सड़क दुर्घटनाओं के डरावने आंकड़े कोर्ट ने सड़क परिवहन मंत्रालय की वर्ष 2023 की रिपोर्ट का संज्ञान लिया। इसके अनुसार देश में 1.72 लाख से अधिक मौतें सड़क हादसों में हुईं। चौंकाने वाली बात यह है कि नेशनल हाईवे कुल सड़कों का मात्र 2% है, लेकिन 30% मौतें इन्हीं पर होती हैं। कोर्ट ने कहा कि यह आर्थिक उत्पादकता वाले 18-45 आयु वर्ग का नुकसान है, जो देश की जीडीपी पर 3% का बोझ डालता है। अतिक्रमण हुआ तो अफसर की जिम्मेदारी हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि दो महीने के भीतर जीआईएस मैपिंग और फोटोग्राफिक सबूतों के साथ जिलेवार स्टेटस रिपोर्ट पेश की जाए। अधिकारियों को आगाह किया गया है कि यदि दोबारा अतिक्रमण हुआ तो उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय होगी।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *