खुदी को कर बुलंद इतना… ये पंक्तियां उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के छोटे से गांव अंडा के रहने वाले पोषककांत राय पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। यह कहानी सिर्फ परीक्षा में बेहतर नंबर लाने की नहीं, बल्कि संघर्षों को हराकर खुद को साबित करने की है। शेड्यूल कास्ट (एससी) वर्ग से आने वाले पोषककांत के पिता कमलेश कुमार नगर पालिका में सफाई कर्मचारी हैं। दादा भी अस्पताल में सफाई का काम करते थे। परिवार ने पीढ़ियों से अभाव और भेदभाव झेला है। गांव में आज भी छुआछूत की सोच पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। बचपन में जब लोग दूरी बनाते थे, तो पोषककांत का मन आहत होता था। ऐसे में पिता की एक बात उनके जीवन का मंत्र बन गई कि अगर पढ़ोगे नहीं, तो हमारी तरह जिंदगी बितानी पड़ेगी। हालात बदलने हैं तो पढ़ाई ही रास्ता है। पोषककांत ने पांचवीं तक गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ाई की। इसके बाद कोंच में आठवीं तक पढ़े। पिता रोज साइकिल से काम पर जाते और बेटे को भी पांच किलोमीटर दूर स्कूल छोड़ते। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने बेटे की पढ़ाई नहीं रुकने दी। नौवीं में जालौन के एक अंग्रेजी माध्यम स्कूल में दाखिला दिलाया। रोज 35 किलोमीटर बस से आना-जाना होता था। दसवीं में जालौन में कमरा लेकर रहना पड़ा, लेकिन नतीजा उम्मीद के मुताबिक नहीं आया—सिर्फ 54 प्रतिशत अंक। इससे आत्मविश्वास डगमगाने लगा। भटके कदम, टूटा सपना
ग्यारहवीं में गलत संगत के कारण पढ़ाई पटरी से उतर गई। नाराज होकर पिता ने पढ़ाई छोड़ने तक की बात कह दी। उस समय लगा कि सपना यहीं खत्म हो गया। लेकिन दोस्त देवांशु ने हिम्मत दी। अपनी गलती समझकर पोषककांत ने दोबारा पढ़ाई शुरू की। बारहवीं में 67 प्रतिशत अंक आए। इसके बाद जेईई मेन के जनवरी सत्र में 22 और अप्रैल में 32 पर्सेंटाइल मिले। यह एक और बड़ा झटका था। बड़े भाई, जो पहले कोटा में पढ़ चुके थे और अब सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज कानपुर में पढ़ रहे हैं, उनका सहारा बने। परिवार की सहमति से पोषककांत को कोटा भेजा गया, जहां उन्होंने मोशन में दाखिला लिया। यहां का अनुशासित माहौल और शिक्षकों का मार्गदर्शन उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उन्होंने मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बना ली। जिन विषयों में पकड़ मजबूत थी, उन्हीं पर फोकस किया और जेईई मेन पर पूरा ध्यान केंद्रित किया। मेहनत रंग लाई। जनवरी सत्र में उन्होंने 90.14 पर्सेंटाइल हासिल कर सबको चौंका दिया। अब उनका लक्ष्य अप्रैल सत्र में और बेहतर प्रदर्शन करना और आगे चलकर जेईई एडवांस्ड में सफलता हासिल करना है।


