भास्कर न्यूज| रायगड़ा दक्षिण ओडिशा की आस्था के प्रमुख केंद्र मां मझिघरियानी मंदिर के पुनर्विकास की महत्वाकांक्षी योजना भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। सरकार द्वारा 36 करोड़ रुपये की इस परियोजना के लिए 26 करोड़ रुपये जारी किए जाने के बावजूद, धरातल पर विकास के नाम पर केवल अव्यवस्था और असुरक्षित गड्ढे ही दिखाई दे रहे हैं। सितंबर 2025 में बड़े तामझाम के साथ शुरू हुई इस परियोजना का लक्ष्य 18 से 24 महीनों में भव्य कॉम्प्लेक्स का निर्माण करना था। लेकिन मार्च 2026 तक की स्थिति चिंताजनक है। परिसर में खुदाई कर गहरे गड्ढे छोड़ दिए गए हैं, जो बारिश में जलमग्न होकर दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं। साइट पर न तो निर्माण सामग्री है और न ही जिम्मेदार अधिकारी। मंदिर में जहां बूंदी लड्डू का प्रसाद तैयार होता है, वहां स्वच्छता के मानकों की धज्जियां उड़ रही हैं। कांग्रेस नेता दुर्गा पांडा ने इस मामले में सीधे प्रशासन और ठेकेदार को घेरा है। उन्होंने तीखे सवाल पूछते हुए कहा कि जब 26 करोड़ रुपये जारी हो चुके हैं, तो साइट पर ईंट, बालू या सीमेंट का एक भी ट्रक क्यों नहीं पहुंचा? ठेकेदार काम छोड़कर भाग चुका है, और यह करोड़ों के गबन का मामला प्रतीत होता है। खर्च का पाई-पाई का हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए। करीब 6.30 एकड़ में प्रस्तावित इस ड्रीम प्रोजेक्ट में आधुनिक मंदिर, तीन विशाल प्रवेश द्वार, 250 लोगों के लिए भोजन हॉल और 26 दुकानों का निर्माण होना था। लेकिन डीपीआर के अनुसार जिन पुराने भवनों को अब तक ध्वस्त हो जाना चाहिए था, वे आज भी वैसे ही खड़े हैं। परियोजना का कार्य काशी कंचना प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा गया है। मंदिर समिति का कहना है कि बजट आवंटित है, लेकिन ठेकेदार और उनके इंजीनियरों की अनुपस्थिति ने कार्य को शून्य कर दिया है। साइट पर सुरक्षा मानकों का अभाव श्रद्धालुओं, विशेषकर दूसरे राज्यों से आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। स्थानीय नागरिकों और पुजारियों ने स्पष्ट मांग की है कि इस परियोजना की तत्काल वित्तीय और तकनीकी ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक हो। 26 करोड़ रुपये के खर्च का मदवार विवरण दिया जाए। अधूरे निर्माण स्थल को तुरंत सुरक्षित किया जाए ताकि श्रद्धालुओं को खतरा न हो।


