मथुरा में कोदंड पिनाक सारंग सेना द्वारा मथुरा जनपद में खंडित मूर्तियों को एकत्रित कर उनका विसर्जन किया गया। सैकड़ों की संख्या में संगठन के कार्यकर्ता पूरे मथुरा जनपद में घूम-घूम कर इधर-उधर पड़ी खंडित मूर्तियों को एकत्रित करते हैं और फिर उन्हें एक साथ मां यमुना के जल में विसर्जित करते हैं। मथुरा में कोदंड पिनाक सारंग सेना संगठन के पदाधिकारी रूपेंद्र सिंह सूबेदार ने बताया कि उनका संगठन विगत 4 वर्षों से तरह-तरह के सामाजिक कार्यों में लगा हुआ है।उन्हीं में से एक कार्य ऐसा है जो हिंदुओं की भावनाओं को आहत पहुंचती है और हिंदू ही इस तरह की वारदातों को अंजाम देते हैं। हिंदू अपने देवी देवताओं की वह भगवान की मूर्तियों को खंडित होने पर इधर-उधर फेंक देते हैं, जिस हिंदू धर्म में यह एक निंदनीय है। सूबेदार रूपेंद्र सिंह ने कहा कि सनातन धर्म में हिंदुओं को अपने भगवान की मूर्तियों को खंडित होने पर फेंकना नहीं चाहिए बल्कि उनका एक स्थान पर जल प्रवाह कर देना चाहिए। सूबेदार गोकुल चंदन ने कहा कि आज लगभग संगठन के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं ने जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से एकत्रित की गई करीब 10000 देवी देवताओं की खंडित मूर्तियों का विसर्जन गोकुल बैराज यमुना किनारे पर किया है। संगठन प्रत्येक 3 महीने में इसी प्रकार खंडित मूर्तियों का सामूहिक रूप से विसर्जन करता है। इस कार्य को करने का संगठन का केवल इतना सा उद्देश्य है कि हमारा हिंदू समाज खंडित मूर्तियों को इधर-उधर फेंक कर अपने ही भगवानों की बेज्जती न करवाए। इस कार्यक्रम में चंचल देवी, कैप्टन मोहरपाल सिंह, सूबेदार रूपेंद्र सिंह, सूबेदार गोकुल चंद , विजय सोलंकी , सूबेदार राधाचरण व संगठन के सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।


