छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले की नागपुर पंचायत में रहने वाली सोनमती साहू के दोनों बेटे देश की सेवा में लगे हैं। बड़े बेटे वीर नारायण साहू (38) एसटीएफ में दंतेवाड़ा में तैनात हैं। वे नक्सलियों से मुकाबला कर रहे हैं। छोटे बेटे रामायण साहू (36) बीएसएफ में सिलीगुड़ी बॉर्डर पर देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। सोनमती ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं हैं। फिर भी उन्होंने अपने दोनों बेटों को अच्छी शिक्षा दिलाई। उनके प्रयास से दोनों बेटे आज देश की सेवा में लगे हैं। सोनमती को अपने बेटों पर गर्व है। वे कहती हैं कि उनके बेटे देश के लिए बने हैं। अगर वे देश के लिए शहीद भी हो जाएं तो उन्हें गम नहीं होगा, बल्कि गर्व होगा। मदर्स डे के मौके पर यह कहानी मां के त्याग और समर्पण को दर्शाती है। एक मां के लिए अपने दोनों बेटों को सेना में देखना गर्व की बात है। हालांकि जब बेटे सीमा पर या युद्ध क्षेत्र में होते हैं, तो चिंता भी होती है। सोनमती अपने बेटों की सुरक्षा के साथ-साथ सभी देशवासियों के लिए प्रार्थना करती हैं। एक बेटा शहीद हुआ दैनिक भास्कर से बातचीत में सोनमती ने बताया कि मेरे तीन बेटे सेना में जवान थे, जिसमे मेरे देवर का बेटा निकेश कुमार साहू (24) जो बिहार के बेतिया में पदस्थ था, वो 2023 में जुलाई माह में शहीद हो गया। अब मेरे दो बेटे वीर नारायण और राम नारायण सेना में रहकर देश सेवा में लगे है। भारत-पाकिस्तान हमले को लेकर सोनमती ने कहा कि पाकिस्तान ने हमसे गलत करने वालो का साथ दिया है। हमेशा आतंकवादी हमला कराकर निर्दोष और देश सेवा में लगे नौजवान बेटों को शहीद किया है। पाकिस्तान से आर-पार की लड़ाई होनी ही चाहिए और इस लड़ाई में अगर मेरे दोनों बेटे शहीद भी हो जाए तो मुझे गम नहीं होगा। भारत मां की सच्ची वीरांगनाएं है मां-बहन, पत्नी सोनमती बताती है कि, जब उनका छोटा बेटा रामनारायण वाघा बॉर्डर में पदस्थ था तो उसने मुझे और अपने पिता को घुमाने बुलाया था, वहां देश के वीर जवानों का देश के प्रति प्रेम जो मैंने देखा वो मुझे अंतिम सांस तक याद रहेगा। जब बेटे सरहद पर तैनात होते हैं, तब घर पर उनकी मां, बहनें, पत्नियां और बेटियाँ भी जंग लड़ती हैं- संघर्ष की, इंतजार की और हौसले की। आज मदर्स डे पर उनके लिए भी एक प्रार्थना ज़रूर कीजिएगा। क्योंकि वो भी भारत मां की सच्ची वीरांगनाएं हैं। पुलिस में नहीं मिली इज्जत तो सेना जॉइन किया सोनवती साहू के बड़े बेटे वीर नारायण साहू पहले छत्तीसगढ़ पुलिस में कार्यरत थे। इस दौरान पुलिस चौकी में किसी बात को लेकर विवाद हो गया तो उन्होंने सेना में भर्ती होने की तैयारी शुरू कर दी। सेना में चयन भी हो गया और सेना जॉइन कर लिया। वीर नारायण अभी दंतेवाड़ा में पदस्थ है और कहते है कि मेरी मां को हम दोनों पर बहुत गर्व करती है कि, हम सेना में पदस्थ होकर सीमा पर देश की सुरक्षा में लगे है। मां ने सेना में जाने के लिए प्रेरित किया सोनवती के छोटे बेटे राम नारायण साहू सिलीगुड़ी में बीएसएफ जवान के पद पर पदस्थ है। एक महीने पहले वे कश्मीर में पदस्थ थे। उनका कहना है कि, जब मेरे बड़े भैया सेना में नौकरी करने लग गए तो मैं स्कूली पढ़ाई करने के बाद गांव में ही खेती बाड़ी का काम करने लगा तो मां ने मुझसे कहा कि, वीर नारायण की तरह तू भी फौज में जाने की तैयारी कर तब मैं मैदान में जाकर दौड़, लंबी कूद ऊंची कूद की तैयारी करने लगा और फिर भर्ती में गया जहां मेरा सिलेक्शन हुआ। रामनारायण बताते है जब भी हम दोनों भाई में से कोई भी एक भाई जब छुट्टी में घर जाता है तो हमें देखते ही मेरी मां के आंखों में खुशी के आंसू उमड़ पड़ते है।


