मनमोहन सिंह के नाम पर जाना जाएगा HIPA:सीएम ने की घोषणा, बोले- बदलेगा हिमाचल प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन का नाम

हिमाचल प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (HIPA) अब देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय डा. मनमोहन सिंह के नाम पर जाना जाएगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को HIPA के 51वें स्थापना दिवस पर इसकी घोषणा की है। पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के निधन के बाद देश में यह पहली घोषणा है। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह ने बुधवार को HIPA के 51वें स्थापना पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता की। उन्होंने HIPA में नवनिर्वित ऑडिटोरियम और भवन का उद्घाटन किया। सीएम सुक्खू ने इस दौरान संस्थान के कर्मचारी और वहां पर चल रहे स्पेशल एजुकेटर व मेंन स्ट्रीम टीचर्स के तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के प्रतिनिधियों को संबोधित किया है। डा. मनमोहन ने किया देश में व्यवस्था परिवर्तन: सीएम सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय डा. मनमोहन सिंह महान अर्थशास्त्री थे और देश के वित्त मंत्री भी रहे। उन्होंने देश में व्यवस्था परिवर्तन किया। उनकी नीतियों से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली और आज देश पूरे विश्व में मान सम्मान के साथ खड़ा हुआ है। यह संस्थान एक प्रीमियम संस्थान है, यहां से IAS ,HAS अधिकारी प्रशिक्षण लेते है और प्रशिक्षण लेने के बाद सरकार की नीतियां जनता तक पहुंचाते है। इसलिए इस संस्थान का नाम पूर्व पीएम डा. मनमोहन सिंह के नाम पर रखा जाएगा। इसको जल्द ही कैबिनेट में मंजूरी के लिए लाया जाएगा। क्या है HIPA हिमाचल प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (HIPA) की स्थापना 1974 में हुई थी। यहां भारतीय प्रशासनिक सेवाएं ( IAS), हिमाचल प्रशासनिक सेवाएं (HAS) सहित कई अन्य परीक्षाओं में चयनित होने वाले अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जाती है। आज HIPA का 51वां स्थापना दिवस है। भाजपा पर साधा निशाना इस दौरान सीएम सुक्खू मीडिया से बातचीत करते हुए भाजपा पर निशाना साधा और कहा कि पूर्व सरकार द्वारा लिया गया कर्जा चुकाने के लिए वर्तमान सरकार को कर्जा लेना पड़ रहा है। सीएम सुक्खू ने कहा कि सरकार ने दो साल में 28000 करोड़ का कर्ज लिया है, जिसमें से 10000 करोड़ ब्याज का चुकता किया और 8 हजार करोड़ रुपया प्रिंसिपल अमाउंट का चुकता किया है। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार समय जब सरकार के पास साढ़े तीन हजार करोड़ का जीएसटी का कंपनसेशन आता था और वह जून 2022 तक आता रहा, तब भी पिछली पूर्व सरकार ने फिस्कल प्रूडेंस और फिस्कल डिसिप्लिन से उसको ठीक करने की कोशिश नहीं। सीएम ने कहा पूर्व सरकार ने RDG की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया व 12 हजार करोड़ से घटकर 3500 करोड़ रह गई है। उसकी तरफ भी कोई ध्यान नही दिया। इसका मतलब यह नहीं है कि कोई भी सरकार उसकी तरफ धयान न दें। हम उसकी तरफ ध्यान दे रहे हैं और उस पर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि उनकी सरकार के फैसलों से अर्थव्यवस्था 2 सालों में पटरी पर आ गई है और हम आत्मनिर्भर हिमाचल की तरफ आगे बढ़ रहे हैं।

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