न्यूनतम 100 दिन रोजगार की गारंटी देने वाली योजना ‘मनरेगा’ का लाभ लेने वालों में प्रतापगढ़ जिले के ग्रामीण मजदूर परिवार सबसे आगे हैं। इस वत्तीय वर्ष अब तक यहां तकरीबन 19800 से अधिक परिवारों ने इस योजना के अंतर्गत 100 या उससे भी ज्यादाकार्यदिवस पूरे कर लिए हैं। यह संख्या प्रदेशभरमें सर्वाधिक है। इतना ही नहीं, प्रतिशत के लिहाज से देखें तोयह संख्या जिले में सक्रिय कुल मनरेगा मजदूरोंका 11 फीसदी से भी अधिक है। जबकि अभीतो वित्तीय वर्ष खत्म होने में तीन माह सेअधिक समय बाकी है। इसी तरह अब तकज्यादा से ज्यादा परिवारों को 100 दिन कारोजगार देने में बाड़मेर दूसरे तथा उदयपुरतीसरे स्थान पर है। बाड़मेर में 16500 परिवारऔर उदयपुर में 12200 से ज्यादा परिवारों नेमनरेगा के तहत 100 दिन का रोजगार पा लियाहै। इनके बाद परिवारों की संख्या के लिहाज सेडूंगरपुर तथा बांसवाड़ा इस सूची में चौथे वपांचवें स्थान पर है। हालांकि प्रतिशत के लिहाजसे नजर डालें तो प्रतापगढ़ के बाद प्रदेश मेंदूसरे स्थान पर सिरोही जिले का नाम आता है।यहां 97 हजार से अधिक परिवार वर्ष2024-25 में मनरेगा में सक्रिय भूमिका में हैं।इनमें से अब तक 6.62 फीसदी ने 100 दिनका रोजगार पूरा कर लिया है। इसके बादउदयपुर में 4.59 फीसदी, बाड़मेर में 4.75फीसदी और बांसवाड़ा में 3.32 फीसदी ग्रामीणमजदूरों को मनरेगा में रोजगार हासिल हुआ है।जबकि संख्या के लिहाज से चौथे स्थान परदिखाई दे रहा डूंगरपुर प्रतिशत के लिहाज सेप्रदेश के 33 जिलों (पुरानी व्यवस्था अनुसार)में छठे स्थान पर है। 21 लाख परिवार ऐसे, जिन्हें30 दिन भी नहीं मिला कामकेंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय कीवेबसाइट बताती है कि राजस्थान मेंअब तक मनरेगा में 1 करोड़ 15 लाखसे ज्यादा परिवार पंजीकृत हो चुके हैं। हालांकि इनमें से 84 लाख ही सक्रियहैं। इनमें 52 लाख 23 हजार से ज्यादाइस वत्तीय वर्ष मनरेगा योजना केअंतर्गत रोजगार हासिल कर चुके हैं।हालांकि इनमें 21 लाख 33 हजारसंख्या ऐसे परिवारों की भी है, जिन्होंनेअब तक 30 दिन से भी कम कामकिया है। या कहें कि इन्हें कम काममिल पाया है। वैसे 1 लाख 3 हजार सेज्यादा परिवारों के लिए 100 दिनरोजगार की गारंटी जरूर पूरी हो चुकी है।


