छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के एक गांव में प्रशासन की सक्रियता से एक नाबालिग लड़की का विवाह रुक गया। यह सफलता जिला महिला एवं बाल विकास विभाग और दो जागरूक महिलाओं की सतर्कता का परिणाम है। सूचना मिलते ही कलेक्टर चंदन त्रिपाठी के निर्देश पर एक टीम मौके पर पहुंची। इस टीम में जिला बाल संरक्षण इकाई, विशेष किशोर पुलिस इकाई, चाइल्ड लाइन, पर्यवेक्षक, ग्राम पंचायत सचिव और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शामिल थे। जांच में पता चला कि लड़की की उम्र 16 साल है। कानूनी प्रावधानों की जानकारी के बाद परिवार ने बदला फैसला टीम ने परिवार को बाल विवाह के कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। इसके बाद परिवार ने विवाह न करने का फैसला लिया। उन्होंने पंचनामे पर हस्ताक्षर किए और शादी का मंडप भी हटा दिया। बाल विवाह कानूनी अपराध है। इसमें दो साल की जेल और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को विशेष सतर्कता बरतनी होगी। बाल विवाह रोकने के लिए नई पहल प्रशासन ने बताया कि हर पंचायत में विवाह पंजीयन रजिस्टर रखना जरूरी है। शादी से पहले वर-वधु की उम्र की जांच होनी चाहिए। अगर किसी को बाल विवाह की जानकारी मिले, तो वह बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी, पंचायत सचिव, स्थानीय थाना या जिला बाल संरक्षण अधिकारी से संपर्क कर सकता है।


