मध्य प्रदेश के डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर के एप्लाइड जियोलॉजी विभाग का एक दल मनेन्द्रगढ़ स्थित एशिया के सबसे बड़े गोंडवाना मरीन फॉसिल्स पार्क पहुंचा। प्रोफेसर डॉ. के.के. प्रजापति और डॉ. एस. सेल्वकुमार के नेतृत्व में एम.टेक द्वितीय वर्ष (चतुर्थ सेमेस्टर) के 27 छात्र-छात्राओं ने लगभग 29 करोड़ वर्ष प्राचीन समुद्री जीवाश्मों का शोध अध्ययन किया। दल के सदस्यों ने पार्क में संरक्षित इन प्राचीन जीवाश्मों का अवलोकन किया। यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम के साथ-साथ व्यावहारिक एवं क्षेत्रीय अध्ययन की दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ। इस अवसर पर पुरातत्व/पर्यटन विभाग के जिला नोडल अधिकारी डॉ. विनोद पांडेय और पुरातत्व संघ के सदस्य विद्याधर गर्ग ने फॉसिल्स पार्क में स्थल पर प्राप्त जीवाश्मों और इंटरप्रिटेशन बिल्डिंग में प्रदर्शित जीवाश्मों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र गोंडवाना काल के समुद्री जीवन का महत्वपूर्ण प्रमाण प्रस्तुत करता है। विशेषज्ञों ने समुद्री जीवाश्मों के वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डाला विशेषज्ञों ने यहां पाए जाने वाले मोलस्का, यूरीडेस्मा एवं एकिलोपेक्टेन जैसे समुद्री जीवाश्मों के वैज्ञानिक एवं भूवैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डाला। वन विभाग द्वारा पत्थरों पर उकेरी गई समुद्री जीवों की आकृतियों एवं शिल्पकला की भी जानकारी दी गई, जिसमें छात्र-छात्राओं ने विशेष रुचि दिखाई। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने जीवाश्मों के निर्माण, संरक्षण एवं उनके भू-वैज्ञानिक महत्व से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार पूर्वक समाधान किया। दल में मिनिरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड के सीनियर जियोलॉजिस्ट बंटी कुमार और सीनियर टेक्नीशियन अंकित लोधी सहित सागर विश्वविद्यालय के कई छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। अंत में विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों एवं छात्र-छात्राओं ने फॉसिल्स पार्क प्रबंधन एवं पुरातत्व विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण से विद्यार्थियों को वास्तविक क्षेत्रीय अध्ययन का अवसर मिलता है, जिससे उनकी शोध क्षमता एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण सुदृढ़ होता है।


