शाहपुरा में अंतरराष्ट्रीय श्री रामस्नेही संप्रदाय का विश्वप्रसिद्ध फूलडोल महोत्सव इन दिनों कस्बे में स्थित रामनिवास धाम में आस्था और श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। इस दौरान यहां एक अनूठी परंपरा देखने को मिलती है, जहां संतान प्राप्ति की मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु अपने बच्चे को मिश्री से तोलकर धाम के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
यह दृश्य फूलडोल महोत्सव के दौरान विशेष रूप से देखने को मिलता है, जब दूर-दराज से आए भक्त अपनी खुशियों को प्रभु चरणों में अर्पित करते हैं। रामनिवास धाम में स्थित पवित्र स्तंभजी के समक्ष यह परंपरा 260 वर्षों से चली आ रही है। परिवारजन आचार्य रामदयाल महाराज के सामने उपस्थित होकर प्रणाम करते हैं। यह परंपरा श्रद्धा, विश्वास और आनंद का प्रतीक बन चुकी है। रामस्नेही संप्रदाय के संत गुरमुख राम महाराज ने बताया कि संप्रदाय के आद्य संस्थापक महाप्रभु स्वामी रामचरण महाराज के पावन स्तंभ के समक्ष मांगी गई असंख्य मनोकामनाएं पूर्ण हुई हैं। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु जब रामद्वारा आते हैं तो स्तंभ के समक्ष श्रद्धा से मोली बांधकर अपनी मनोकामना व्यक्त करते हैं और मनोकामना पूरी होने पर पुनः यहां आकर आभार व्यक्त करते हैं। इसी कड़ी में शाहपुरा के मूलचन्द पेसवानी का परिवार भी हाल ही में रामनिवास धाम पहुंचा। देवेंद्र पेसवानी के पुत्र विनायक के जन्म की खुशी में परिवार ने नन्हे विनायक को स्तंभ के समक्ष मिश्री से तोलकर अपनी श्रद्धा अर्पित की। इसके बाद मिश्री को प्रसाद के रूप में उपस्थित श्रद्धालुओं में वितरित किया गया।
इस अवसर पर परिवार के सदस्यों ने धाम के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए कहा कि यह परंपरा न केवल विश्वास का प्रतीक है, बल्कि जीवन की खुशियों को प्रभु के चरणों में समर्पित करने का एक माध्यम भी है।


