वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान समारोह के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा ईडी की कार्रवाई के दौरान दस्तावेज उठाकर ले जाने के मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। सीएम ने कहा कि किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री से यह अपेक्षा होती है कि वह प्रवर्तन निदेशालय जैसे केंद्रीय संस्थानों के साथ सहयोग करे। सीएम मोहन यादव ने कहा, हम सभी शपथ इसी बात के लिए लेते हैं कि संवैधानिक संस्थाओं के साथ सहयोग करेंगे। लेकिन ऐसे माहौल में यदि स्वयं मुख्यमंत्री इस तरह की हल्की हरकत करें, तो यह उचित नहीं है। एक राज्य की मुख्यमंत्री के नाते से उनका यह कृत्य कतई सही नहीं माना जा सकता। वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान समारोह में संस्कृति और इतिहास पर फोकस इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान समारोह एवं संगोष्ठी को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वाकणकर बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे और उन्होंने अपने जीवन में अनेक उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित कीं। सीएम ने कहा कि संगीत, मूर्ति कला, चित्रकला और पुरातत्व जैसे विविध क्षेत्रों में वाकणकर का विशिष्ट योगदान रहा। विशेष रूप से फॉरेस्ट और मानव इतिहास के अध्ययन में उनका कार्य सदैव स्मरणीय रहेगा। नदी उत्खनन से उजागर हुई एमपी की प्राचीन सभ्यता मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. वाकणकर ने उत्खनन के क्षेत्र में दूरगामी और ऐतिहासिक योगदान दिया। उन्होंने मध्यप्रदेश में महेश्वर, मंदसौर, नावदा टोली, रुणिजा और आजाद नगर सहित अनेक स्थलों पर नदी उत्खनन कर प्रदेश की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर को उजागर किया। सीएम ने कहा कि वाकणकर की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने पुरातत्व को जन-सामान्य की रुचि का विषय बनाया। यह दृष्टि अद्भुत, दूरदर्शी और आज भी अनुकरणीय है। यशोधर मठपाल को मिला वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान कार्यक्रम में मध्यप्रदेश सरकार की ओर से वरिष्ठ विद्वान डॉ. यशोधर मठपाल को डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया। सम्मान के तहत उन्हें दो लाख रुपए की राशि और सम्मान पत्र प्रदान किया गया। इस अवसर पर 20वीं सदी के स्वतंत्रता आंदोलन के दुर्लभ छायाचित्रों के संकलन पर आधारित पुस्तक का भी विमोचन किया गया। 14 जनवरी से होगा श्री महाकाल महोत्सव मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी घोषणा की कि उज्जैन में 14 जनवरी से श्री महाकाल महोत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह आयोजन आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का उत्सव होगा, जिसमें देशभर से श्रद्धालु और कला-संस्कृति प्रेमी शामिल होंगे। संघ की टोपी लगाकर आपातकाल के दौर में लिया था पद्मश्री सम्मान सीएम ने वाकणकर को पद्मश्री दिए जाने का किस्सा सुनाते हुए कहा- प्रकाशचंद सेठी जब मुख्यमंत्री थे उस समय उन्होंने जब वाकणकर जी को पद्मश्री मिलने की सूचना दी तो उन्होंने कहा- “मैं तो संघ की गणवेश में ही पुरस्कार लेने जाऊंगा।” इसके बाद सेठी जी चिंतित हो गए। उन्होंने वाकणकर जी से चर्चा की तो भी उन्होंने कहा कि मैं संघ की गणवेश में भले न जाऊं लेकिन संघ की टोपी लगाकर ही पद्मश्री लेने जाऊंगा और आपातकाल के दौर में उन्होंने संघ की टोपी पहनकर पद्मश्री ग्रहण की, जो उनके वैचारिक साहस का प्रतीक बन गया। मोदी के नेतृत्व और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का जिक्र मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को स्थिर सरकार मिली। 2019 में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भारत का हजारों साल पुराना इतिहास और संस्कृति फिर से गौरव के साथ खड़ी हो रही है।


