भास्कर न्यूज| जांजगीर आयुष्मान भारत योजना (शहीद वीरनारायण सिंह स्वास्थ्य सहायता योजना) में मरीजों से छुट्टी के दौरान फीडबैक फार्म भरवाया जा रहा है। ऐसे फीडबैक फार्म में सात सवाल दिए हैं। फीडबैक फार्म के अनुसार अस्पतालों की व्यवस्था में सुधार की जाएगी, ताकि योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके और कैशलेस इलाज करवा सके। जिले के सरकारी अस्पतालों के अलावा पंजीकृत निजी अस्पतालों में योजना के तहत मरीजों का इलाज किया जा रहा है। सभी अस्पतालों को मरीजों से फीडबैक फार्म भरवाना है। कई सरकारी व निजी अस्पतालों में अव्यवस्थाओं के चलते मरीजों को परेशानी भी उठानी पड़ती है। कुछ निजी अस्पताल पैकेज कम होने का हवाला देकर मरीजों से अतिरिक्त पैसे भी लेते हैं। हालांकि स्टेट नोडल एजेंसी ऐसे कुछ अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई करता है, पर यह नाकाफी है। फार्म भरने से अस्पताल में हुए इलाज, व्यवस्था व डॉक्टर से लेकर नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ के व्यवहार के बारे में वास्तविकता का पता चल सकेगा। छुट्टी के दौरान सभी मरीजों से फीडबैक फार्म भरवाना अनिवार्य किया गया है ताकि कोई भी मरीज न छूट पाए। मरीजों को सवालों के जवाब हां, ना, संतुष्ट, असंतुष्ट, साधारण, अच्छा या बहुत अच्छा में देना है। हर सवाल के आगे जवाब के लिए विकल्प दिया गया है। इसमें सही का निशान लगाना है। सरकारी अस्पतालों में स्टाफ के रूखे व्यवहार के कारण ज्यादातर विभागों में मरीज जबरन छुट्टी करवाकर चले जाते हैं। इसे लामा यानी लेट अगेनेस्ट मेडिकल एडवाइज कहा जाता है। इसमें भर्ती ज्यादातर मरीज छुट्टी करवाकर निजी अस्पताल चले जाते हैं या हताश होकर घर। कुछ वार्डों में निजी अस्पतालों के एजेंट भी घूमते रहते हैं, जो स्टाफ की छवि खराब कर इलाज अच्छा नहीं होने का कान भरते हैं। लामा के ज्यादातर मामले में नर्सिंग स्टाफ का रूखा व्यवहार ज्यादा जिम्मेदार है, क्योंकि मरीज के सबसे ज्यादा संपर्क में यही दोनों लोग होते हैं। सरकारी अस्पतालों में रोजाना औसतन 15 से 20 मरीज अस्पताल से लामा करवाकर जाते हैं।


