बुद्ध गिरी आश्रम के महंत दिनेश गिरी ने धर्म सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यदि अब भी हिंदू समाज सुषुप्त अवस्था में रहा, तो भविष्य में उनके साथ भी बांग्लादेश जैसी घटनाएं हो सकती हैं। दिनेश गिरी ने इस बात पर अफसोस जताया कि धर्म और कर्म को जीवन में महत्व देने वाले लोग सामाजिक क्रांति और राष्ट्र धर्म की रक्षा का दायित्व केवल संत महंतों पर छोड़ देते हैं, जो कि एक गंभीर चिंतनीय विषय है। इस दौरान इंदौर के बाबा सत्यनारायण मौर्य ने कहा कि आज नए मंदिरों के निर्माण की आवश्यकता नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि भावी पीढ़ी उन मंदिरों में जाकर धर्म संस्कार के साथ उनकी रक्षा कर सके। उन्होंने कहा कि आज सनातन समाज की जो स्थिति है, वह एक बड़े खतरे की घंटी है। ददरेवा के महंत कृष्णनाथ के उद्बोधन से हुई। इस सभा में महावीर जतिजी, शिवराज जतिजी, संत राम गिरी, ब्रह्मचारी विकास चैतन्य, संत सोमनाथ महाराज, ढंदाल आश्रम के संत संपत नाथ और दत्तात्रेय आश्रम के जगदीश पुरी भी मंच पर उपस्थित थे। मंदिर पहुंचने पर संत महंतों ने पुजारी बाबूलाल स्वामी के सान्निध्य में बाबा रामदेव की धोक लगाई। तारानगर से यहां आने के दौरान नन्यांगली के तनोट माता मंदिर में पुजन किया और राजगढ़ सीमा पर स्थित श्री पंचमुखी बालाजी धाम गौशाला में भी गोपूजन करते हुए गुड़ खिलाया। महंत गिरवर सिंह ने उनका स्वागत किया। संतों के साथ अंबेडकर सर्किल से शोभायात्रा की शुरुआत हुई, जिसमें मोटरसाइकिल सवार भी शामिल थे। लोग शोभायात्रा के स्वागत के लिए तैयारी किए हुए थे, लेकिन आखिरी समय में शोभायात्रा का मार्ग बदल दिया गया।


