डीडवाना में महाशिवरात्रि पर्व पर सांप्रदायिक सौहार्द का अनूठा नजारा देखने को मिला। नाथ संप्रदाय के महंत लक्ष्मण महाराज का जुलूस मुस्लिम बहुल इलाकों से गुजरा, जहां मुस्लिम समुदाय के लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया। जोगामंडी धाम के महंत लक्ष्मण महाराज महाशिवरात्रि के अवसर पर सुबह रथ पर सवार होकर गाजे-बाजे के साथ नगर भ्रमण पर निकले। उनका जुलूस सबसे पहले सैयदों की हताई और काजियों के मोहल्ले में पहुंचा। यहां शहरकाजी रेहान उस्मानी, इस्तेखार उस्मानी, मनवर उस्मानी, शकील अहमद उस्मानी, सैयद तौसीफ अली, सैयद रजा अली, सैयद इमरान अली, सैयद एजाज अली, आदिल उस्मानी, मसरूर उस्मानी, लतीफ भाटी और मोहम्मद साबिर सहित मुस्लिम समुदाय के कई प्रमुख लोगों ने नाथजी महाराज का अभिनंदन किया।
इस अवसर पर महंत ने लोगों को विशेष ‘रोट’ भेंट किया। ऐसी मान्यता है कि यह रोट अन्न को समर्पित होता है और इसे अनाज के साथ रखने से घर में बरकत होती है तथा अन्न की कमी नहीं होती। हिंदू और मुस्लिम समुदाय एक साथ मनाते है त्योहार
डीडवाना शहर राजस्थान में सांप्रदायिक सौहार्द के लिए जाना जाता है। यहां हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग सदियों से दीपावली, होली और ईद जैसे त्योहारों को एक साथ मनाते आ रहे हैं, जो गंगा-जमुनी तहजीब का एक बड़ा उदाहरण है। महाशिवरात्रि पर निभाई जाने वाली यह परंपरा दोनों धर्मों के बीच एकता को और मजबूत करती है। सदियों पुरानी है साम्प्रदायिक सद्भावना की मिसाल
नाथ सम्प्रदाय के इस जोगा मण्डी धाम में जब भी नाथ मठाधीश की नियुक्ति होती है, तब मुस्लिम समाज उन्हें पगड़ी पहनाता है और माथुर समाज शॉल ओढ़ाता है, तब जाकर नए महंत की नियुक्ति होती है।
यही वजह है कि डीडवाना में सदियों पूर्व साम्प्रदायिक सद्भावना की जो नींव हिन्दू-मुस्लिम समुदायों के पूर्वजों ने डाली थी, वो आज भी बदस्तूर जारी है। दोनों समुदायों के लोग न केवल इस परम्परा का पौराणिक तरीके से अनुसरण कर रहे हैं, बल्कि देश व दुनिया को भी साम्प्रदायिक सद्भाव का संदेश दे रहे हैं। यह परम्परा यह दर्शाती है कि भारत की गंगा जमुनी तहजीब आज भी जिंदा है, जो दुनिया को बताती है कि सभी भारतीय एक हैं।


