भास्कर न्यूज | अमृतसर महानुभाव साहित्य ज्ञान का भंडार है। यह मूल रूप से मराठी भाषा में है। इसका हिंदी अनुवाद करने का संकल्प जय कृष्णियां मंदिर के संचालक दर्शनाचार्य सागर मुनि शास्त्री ने लिया है। हाल ही में मंदिर में प्रकाशन समारोह हुआ। इसमें शास्त्री द्वारा लिखित “मूर्तिज्ञान’ ग्रंथ का समाज सेविका अंजना लूथरा ने विमोचन किया। इस मौके पर अंजना लूथरा ने कहा कि शास्त्री हर साल एक ग्रंथ लिखने का संकल्प ले चुके हैं। यह समाज और धर्म के लिए क्रांतिकारी कदम होगा। शास्त्री ने कहा कि ” मूर्तिज्ञान’ ब्रह्मविद्या शास्त्र से जुड़ा है। इसमें कलियुग में अवतीर्ण हुए श्री चक्रधर स्वामी की दिव्य मूर्ति का वर्णन है। उनके प्रयासों से युवाओं में अध्ययन के प्रति रुचि बढ़ रही है। इससे पहले वे सात ग्रंथ लिख चुके हैं। उन्होंने कहा कि भौतिक साधनों के अधिक प्रयोग से मानसिक तनाव बढ़ रहा है। इससे मुक्ति का एकमात्र उपाय धर्म ग्रंथों का अध्ययन है। समारोह में अंजना लूथरा, पूजा शिंगारी, शुभ सरीन, गौतम सरीन, अमित शिंगारी सहित कई भक्त मौजूद रहे।


