महाशिवरात्रि पर मनेन्द्रगढ़ के शिवालयों में उमड़ी भीड़:3 साल की श्रेष्ठा ने झांझ बजाकर ‘बम भोले’ गाकर की महादेव की भक्ति, वीडियो वायरल

महाशिवरात्रि के मौके पर मनेन्द्रगढ़ के कर्म घोंघेश्वर शिव मंदिर सहित शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। घंटियों और शंख की ध्वनि के बीच बम बम भोले के जयकारे गूंज रहे हैं। सुबह से ही शिव भक्त मंदिरों में पहुंच रहे हैं। इस बीच मनेन्द्रगढ़ की एक छोटी बच्ची की भक्ति का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। यह वीडियो मनेन्द्रगढ़ के नदीपार क्षेत्र की 3 वर्षीय श्रेष्ठा का है, जिसमें वह दोनों हाथों से झांझ बजाते हुए ‘बम भोले’ भजन गाती नजर आ रही है। नर्सरी की छात्रा श्रेष्ठा का यह भक्ति भाव देखने लायक है। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग उस बच्ची की अद्भुत भक्ति की सराहना कर रहे हैं। दादी के साथ भजन मंडली में शामिल होती है श्रेष्ठा
श्रेष्ठा की भक्ति भावना की नींव उनकी दादी के साथ जुड़ी हुई है। वह नियमित रूप से अपनी दादी के साथ भजन मंडली में शामिल होती है, जहां वह भक्ति गीतों का श्रवण करती है और गायन में भी भाग लेती है। हर मंगलवार को श्रेष्ठा अपनी दादी के साथ मनेन्द्रगढ़ के पास स्थित विजय हनुमान टेकरी पर जाती है, जहां वे शिव और हनुमान जी के भजन गाती है। उनके मन में भगवान के प्रति अडिग श्रद्धा और भक्ति की भावना इतनी प्रगाढ़ है कि वह घर पर भी झांझ और ढोलक के साथ ‘बम भोले’ और ‘राम आएंगे’ जैसे भजन गाती रहती हैं। महाशिवरात्रि पर भक्तों का उमड़ा सैलाब
इधर, महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर मनेन्द्रगढ़ स्थित प्रसिद्ध शिव मंदिर कर्म घोंघेश्वर घाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी। यह मंदिर दुर्गम पहाड़ की तलहटी में स्थित है, जो हर साल महाशिवरात्रि के अवसर पर भक्तों के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र बन जाता है। मनेन्द्रगढ़ सांस्कृतिक मंच द्वारा मंदिर परिसर में भोलेनाथ के भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में शिव भक्तों ने भाग लिया और प्रसाद ग्रहण किया। मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने शिव पूजा में लिया भाग
महाशिवरात्रि के इस खास अवसर पर, स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने भी डोमनहिल चिरमिरी स्थित संकट मोचन मंदिर में भगवान शिव की पूजा अर्चना की। इस दौरान उन्होंने भगवान शिव से आशीर्वाद प्राप्त किया और शिव के भजनों का गायन भी किया। मंत्री के भजन गाने से मंदिर में भक्तिमय माहौल बना और श्रद्धालुओं में एक विशेष ऊर्जा का संचार हुआ।

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