महासमुंद के 1800 आंगनबाड़ी केंद्र बंद:3600 कार्यकर्ता-सहायिकाएं सरकारी कर्मी घोषित करने समेत 3 मांगों पर धरने पर;बोले-छुट्टी लेने पर होती है मानदेय में कटौती

महासमुंद जिले के बागबाहरा में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर दो दिवसीय धरने पर बैठ गई हैं। इस हड़ताल के कारण जिले के 1800 आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताला लग गया है। छत्तीसगढ़ जूझारू आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका कल्याण संघ सहित संयुक्त मंच के बैनर तले जिले की कुल 3600 कार्यकर्ता और सहायिकाएं इस प्रदर्शन में शामिल हैं। उनकी प्रमुख मांगों में शासकीय कर्मचारी का दर्जा, मानदेय में वृद्धि और मूलभूत सुविधाओं का प्रावधान शामिल है। छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के पदाधिकारी भी धरना स्थल पर पहुंचकर उनकी मांगों को जायज ठहराया है। संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि सहायिकाओं को केंद्र सरकार से 2250 रुपए और कार्यकर्ताओं को 4500 रुपए मानदेय मिलता है। राज्य सरकार का अंश मिलाकर सहायिकाओं को कुल 5,000 रुपए और कार्यकर्ताओं को 10,000 रुपए मिलते हैं। छुट्टी लेने पर मानदेय में कटौती पदाधिकारियों का कहना है कि पेंशन, ग्रेच्युटी, समूह बीमा और चिकित्सा अवकाश जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करना कठिन हो रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अवकाश लेने पर मानदेय में कटौती की जाती है। उनका कहना है कि महिला-बाल विकास विभाग के अलावा अन्य विभागों के कार्य भी लिए जाते हैं। मूल कार्य से अलग जिम्मेदारियां सौंपने का आरोप संघ ने बताया कि कई बार उन्हें सभाओं में भीड़ जुटाने जैसे कार्यों में भी लगाया जाता है, जो उनके मूल कार्य से अलग है। उनका कहना है कि काम के समय हमें शासकीय कर्मचारियों से अधिक जिम्मेदार माना जाता है, लेकिन अधिकार और सुरक्षा शून्य है। विधानसभा का घेराव की चेतावनी उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो 9 मार्च को विधानसभा का घेराव किया जाएगा। इसके बाद भी सुनवाई न होने पर संघ अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन के लिए बाध्य होगा।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *