सदन में बुधवार को झारखंड कारा एवं सुधारात्मक सेवाएं विधेयक 2025 पारित हो गया। विधेयक में जेल संचालन से संबंधित कई तरह के नियम बनाए गए हैं। इसमें जेल की सुरक्षा ढांचा, महिला, पुरुष के साथ ही महिला ट्रांसजेंडर व पुरुष ट्रांसजेंडर के रहने से संबंधित मामले शामिल किए गए हैं। बंदियों का सुरक्षा वर्गीकरण, बंदियों के पेरोल और फरलो, बंदियों से मुलाकात, कैदियों का राज्य के भीतर और बाहर के जेलों में ट्रांसफर, बीमार कैदियों के इलाज समेत तमाम िबंदुओं को शामिल किया गया है। महिला बंदियों के लिए नियमों के अनुसार, अलग मुलाकात कक्ष उपलब्ध होगा। अधीक्षक या जेलर अन्य महिला कक्षपालों की उपस्थिति में महिला कारा परिसर तथा कक्षों का भ्रमण करेंगे। यदि किसी आपातकालीन स्थिति में उन्हें महिला कारा परिसर का भ्रमण करना पड़े तो उनके साथ कर्तव्य पर नियुक्त उच्च कक्षपाल भी होगा। गर्भवती महिला बंदी का जेल या जेल अस्पताल में प्रसव नहीं : प्रवेश के समय प्रत्येक महिला बंदी का गर्भावस्था परीक्षण किया जाएगा। यदि गर्भवती पाई जाती है तो चिकित्सा पदाधिकारी इसकी सूचना अधीक्षक को देंगे। किसी भी परिस्थिति में गर्भवती महिला बंदी का जेल में प्रसव नहीं कराया जाएगा। अनिवार्य रूप से प्रसूति वार्ड और सर्जरी विभाग से सुसज्जित जिला अस्पताल में जन्म देना चाहिए। मुत्युदंड की सजा पाए कैदी के साथ दिन-रात एक सुरक्षाकर्मी रहेगा: विधेयक में कहा गया है कि मृत्यु दंड की सजा पाए बंदी को अन्य सभी बंदियों से अलग एक प्रकोष्ठ में रखा जाएगा और दिन-रात में उसे एक सुरक्षाकर्मी के प्रभार में रखा जाएगा। विधेयक पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक सुझाव दिया। उन्होंने सरकार से कारा प्रशासन का हेड आईजी स्तर के अधिकारी की जगह डीजी स्तर के अधिकारी को बनाने का सुझाव दिया। साथ ही कहा कि राज्य सरकार को केंद्र के मॉडल के आधार पर सुधार करना चाहिए।


