महीने भर से गायब दोस्तों के शव कार में मिले:38 दिन से मिसिंग थे; किसानों को गाड़ी की छत पानी में नजर आई

जीजा की कार लेकर निकले 38 दिन से लापता साले और उसके दोस्त का शव तालाब में कार में डूबा हुआ मिला। किसानों को तालाब में कार की छत सतह पर नजर आई थी। इसके बाद पुलिस को बुलाया और JCB के जरिए कार को बहार निकाला तो इसमें 2 शव नजर आए। कार के नंबरों के आधार पर परिजनों को सूचना दी गई और शवों की पहचान हुई। शव इतनी बुरी अवस्था में थे कि शरीर से चमड़ी उधड़ गई थी। मामला टोंक के दूनी थाने के आवां कस्बे के बूंदी रोड स्थित रामसागर तालाब का सोमवार सुबह 9 बजे का है। 8 जनवरी से लापता थे देवली डीएसपी रामसिंह ने बताया- बूंदी के दबलाना थाना क्षेत्र के रेण निवासी रमेश (43) पुत्र जगन्नाथ गुर्जर, महावीर (40) पुत्र सेवा गुर्जर के शव टोंक के दूनी थाने के आवां कस्बे के बूंदी रोड स्थित रामसागर तालाब मिले। ये दोनों 8 जनवरी से कार के साथ लापता थे। संभवतया रास्ता भटकने से कार तालाब में चली गई। इसके बाद दोनों बाहर नहीं निकल पाए और दम घुटने से मौत हो गई। JCB से निकाली कार DSP ने बताया- सुबह ग्रामीणों ने सूचना दी थी कि बूंदी रोड स्थित रामसागर तालाब में कार का डूबी हुई है। तालाब में उसका ऊपरी हिस्सा किसानों को नजर आ रहा था। इसके बाद मौके जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचे और ध्यान से देखने पर स्विफ्ट डिजायर कार नजर आई। इसके बाद JCB को बुलाकर दोनों के शव को बाहर निकाला गया। पहले ट्रैक्टर से निकालने की कोशिश की थी। लेकिन, सफलता नहीं मिली। इसके बाद करीब 3 घंटे बार JCB मंगवा कर 12 बजे निकाला गया। जानकारी के अनुसार, पुलिस ने कार के नंबरों के आधार पर पहचान की और परिजनों को इसके सूचना दी। बोले- सर्दी है कार लेकर जाएंगे रमेश के जीजा ने सीताराम बताया- देवली तहसील क्षेत्र के गांवड़ी गांव में उसके मामा के सामाजिक कार्यक्रम में खाना खाकर रमेश, महावीर बाइक से वापस गांव जा रहे थे। दोनों रास्ते मेरे (सीताराम गुर्जर) के घर थोड़ी देर रुक गए। फिर सर्दी ज्यादा होने की कहकर मेरी कार यह कहकर ले गए कि कल वापस ले आएंगे। उसके बाद ये बूंदी जिले के अपने गांव नहीं पहुंचे। अगले दिन 9 जनवरी को दूसरे दिन रमेश के परिजनों कॉल आया कि वे घर नहीं आए हैं। फिर मृतकों के परिजनों ने दबलाना थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस और परिजनों ने कुछ दिन तक काफी तलाशा, लेकिन कई नहीं मिले। रमेश दो बहनों में इकलौता भाई था।

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