भास्कर न्यूज| अंबागढ़ चौकी बिना अनुमति मकान निर्माण व संपत्ति कर स्वनिर्धारण फॉर्म नहीं भरने के एक मामले में नगर पंचायत ने अपने निकाय के ही प्रथम नागरिक अनिल मानिकपुरी को नोटिस जारी किया है। नगर पंचायत ने नपं अध्यक्ष को नियमानुरूप स्वनिर्धारण फार्म भर कर निकाय के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। नपं के इस नोटिस के बाद नगर में ही हडकंप मचा हुआ है। नपं के कार्यों में प्रशासनिक कसावट लाने और राजस्व वसूली से जुड़े कार्यों में तेजी व पारदर्शिता लाने व सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार लाने के दृष्टिकोण से नपं ने अपने अध्यक्ष को ही बिना अनुमति मकान निर्माण एवं संपत्ति का स्वनिर्धारण फॉर्म नहीं भरने के मामले में नपं अध्यक्ष मानिकपुरी को एक मई को नोटिस जारी किया है। सीएमओ विजय पांडेय के द्वारा जारी इस नोटिस में नपं अध्यक्ष को छग नगर पालिका नियम के भवन व भूमि के कर योग संपत्ति मूल्य का निर्धारण का 2021 की कंडिका 12 के अंतर्गत फॉर्म नहीं भरने की जानकारी देते हुए शीघ्रातिशीघ्र फार्म भरकर जमा करने का निर्देश दिया है। नपं अध्यक्ष को जारी नोटिस की तामिली स्वयं निकाय के सीएमओ विजय पांडेय व उपयंत्री हरीशंकर वर्मा तथा राजस्व शाखा प्रभारी जलील अहमद रब्बानी ने कराया है। एक महीने के अंदर सर्वे करने कहा गया बताया जाता है कि नगर सरकार की सामान्य सभा की पहली बैठक में स्वयं नपं अध्यक्ष की ओर से निकाय प्रशासन को यह निर्देश दिया गया है कि नगर के विभिन्न वार्डों में निर्मित ऐसे मकान जिनका नाम राजस्व अभिलेख व राजस्व पंजी में जुड़ा नहीं है। ऐसे मकानों को चिन्हाकिंत कर उनका नाम न केवल राजस्व पंजी में जोड़ा जाए बल्कि संपत्ति कर के लिए स्वनिर्धारण फार्म भरा कर उन्हें निकाय की ओर से सभी तरह से सुविधाएं प्रदान की जाए। नगर सरकार और नपं अध्यक्ष की ओर से निकाय प्रशासन को यह निर्देश है कि राजस्व रिकार्ड से छूटे नगर के सभी 15 वार्डो में निर्मित सभी तरह के भवनों व मकानों को एक महीने के अंदर सर्वे कर परिषद के समक्ष प्रस्तुत करें। मकानों का संपत्ति कर निर्धारण नहीं हो पा रहा बिक्री इकरारनामा के आधार पर आदिवासी जमीन में नगर के विभिन्न वार्डों में बनाए गए मकान नगर पंचायत के राजस्व पंजी में जुड़ नहीं पाए हैं। ऐसे मकानों को नगर पंचायत के राजस्व रिकार्ड में चढ़ाने के लिए नपं अध्यक्ष ने नगरीय प्रशासन विकास विभाग एवं राजस्व विभाग के शीर्ष अफसरों से मार्गदर्शन मांगा है। बताया कि नगर के विभिन्न वार्डों में 50 व 100 रुपए के स्टांप में बिक्री इकरारनामा कर आदिवासियों की जमीन में बनाए गए मकान नगर पंचायत के राजस्व रिकार्ड में चढ़ नहीं पाए है। जिसके कारण ऐसे मकानों का संपत्ति कर निर्धारण नहीं हो पा रहा है। पट्टे की जमीन पर बने मकानों को बेचा अविभाजित मध्यप्रदेश व डॉ. रमन सिंह की सरकार के समय आबादी पट्टा व कांग्रेस की भूपेश सरकार के समय घास जमीन व शासकीय भूमि में कब्जा कर निवास करने वाले नगर के सैकड़ों लोगों को आबादी व घास जमीन का पट्टा दिया गया था। इसमें से काफी संख्या में ऐसे लोग जो शासन से पट्टा लेकर पट्टे की जमीन को 50 व 100 रुपए का स्टांप में बिक्री इकरारनामा के आधार पर पट्टे की जमीन में निर्मित मकानों को बेच दिए हैं। जिन्होंने पट्टे की जमीन में निर्मित मकानों को खरीदा है। वे अब नपं से निकाय के राजस्व रिकार्ड में नाम चढ़ाने की मांग कर रहे हैं। ऐसे प्रकरणों में भी अध्यक्ष ने राजस्व विभाग व नगरीय प्रशासन विकास विभाग के उच्च अधिकारियों को नाम चढ़ाने के लिए मार्गदर्शन मांगा है।


