हरियाणा के झज्जर जिले के कबलाना गांव के आशीष ने अपनी मां के गंभीर बीमारी से ठीक होने पर 600 किलोमीटर की दंडवत यात्रा शुरू की है। यह यात्रा उन्होंने सोजत स्थित त्रिलोक भारती जी के धाम तक की है, जिसकी शुरुआत 7 अक्टूबर को हुई थी और 3 मार्च को पूरी होने की संभावना है। मां के लिए मांगी मन्नत हुई पूरी आशीष की मां लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं और इलाज के बावजूद उनकी सेहत में सुधार नहीं हो रहा था। परिवार ने सोजत के पास स्थित त्रिलोक भारती जी के धाम के बारे में सुना, जहां आशीष अपनी मां को लेकर गए। उन्होंने वहां मन्नत मांगी कि यदि मां स्वस्थ हो गईं, तो वह अपने गांव से दंडवत यात्रा करते हुए धाम तक आएंगे। इसके बाद मां के स्वास्थ्य में चमत्कारी रूप से सुधार हुआ और वह पूरी तरह स्वस्थ हो गईं। 7 अक्टूबर को शुरू की थी यात्रा मां के ठीक होने के बाद, आशीष ने 7 अक्टूबर को अपने गांव से अकेले ही यह यात्रा शुरू की। वह अपने साथ एक व्हीलचेयर पर अपना सामान लेकर चल रहे थे। रास्ते में वह व्हीलचेयर को आगे धकेलते, दरी बिछाते और उस पर दंडवत करते हुए आगे बढ़ते रहे। उन्होंने रोजाना लगभग 3 से 7 किलोमीटर का सफर तय किया। यात्रा के दौरान उन्हें कई मुश्किलों और थकान का सामना करना पड़ा, लेकिन त्रिलोक भारती जी महाराज के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा ने उन्हें धैर्य बनाए रखने में मदद की। राजस्थान में हर जगह मिल रहा लोगों से प्यार शुक्रवार शाम को जब आशीष सोजत पहुंचे, तो उन्हें देखकर लोग आश्चर्यचकित रह गए। यात्रा का उद्देश्य जानने पर लोगों ने मां के प्रति उनके प्रेम की सराहना की और उनका आदर-सत्कार किया। आशीष ने बताया कि रास्ते में राजस्थान के लोगों ने उन्हें बहुत प्यार और सहयोग दिया। हर जगह उन्हें भोजन, चाय, पानी, ठंडी छाया और रुकने की व्यवस्था मिली, जिसके बलबूते ही यह यात्रा संभव हो पाई। उन्होंने राजस्थान के लोगों के प्यार और अपनेपन को अद्वितीय बताया।


